उत्तर प्रदेश

पुलिस ने गैंगस्टर विकास दुबे के कमरे से वायरलेस माइक बरामद किया

कानपुर के बिकरू में पुलिसकर्मियों से खूनी खेल खेलने के बाद भले ही विकास दुबे फरार हो गया हो, लेकिन ग्रामीणों में अभी भी उसके लौट कर आने को लेकर दहशत साफ तौर पर  देखने को मिली।

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ग्रामीणों ने कहा वो पंडितजी के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते हैं। जब पुलिस वाले खुद का न बचा जाए, तो हमार कौउन गारंटी है। गुरुवार की रात जब विकास और उसकेगुर्गे पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसा रहे थे, तो उस वक्त ग्रामीण अपने घरों में सुकून की नींद सो रहे थे।

यह कहना है विकास दुबे के घर के पीछे रहने वाले कुछ ग्रामीणों का। उन्होंने बताया कि विकरू में आए दिन कभी किसी से विवाद को लेकर तो कभी सिर्फ असलहों की टेस्टिंग के कारण अक्सर पंडितजी के घर से फायरिंग की आवाजें आती रहती थीं।

गोलियों की तड़तड़ाहट सुन-सुन कर वो इसके इतने आदी हो चुके थे, कि अब उन्होंने इस पर ध्यान देना ही बंद कर दिया था।

ग्रामीणों केअनुसार गुरुवार को हुई घटना के चार दिन पहले भी पंडितजी का किसी से विवाद हुआ था, जिसमें भी ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी।

इसके बाद जब गुरुवार की रात भी फायरिंग की आवाजें आईं तो इसे आम दिनों की तहर गोलियों की तड़तड़ाहट समझ कर किसी ने अपने घरों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाई। विकास के  खिलाफ बयान देने के सवाल पर ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर वो बच कर आ गया तो किसी को नहीं छोड़ेगा।

विकास ने अपने घर में आगे के जिस कमरे को सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रूम बना रखा था, वहां से घटना के चौथे दिन भी पुलिस ने कई कारतूस और खोखे बरामद किए हैं।

यहां से पुलिस को कई लोगों के नाम से असलाहा के लाइसेंस भी बरामद हुए। ऐसे में आंकलन लगाया जा रहा है कि विकास ने धोखाधड़ी कर कई लोगों के नाम से असलाहा ले रखा था। इसके अलावा पुलिस ने कमरे से एक वायरलेस माइक भी बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल वह अपने गुर्गों से संपर्कमें बने रहने के लिए करता था।

पुलिस को विकास के घर के पास एक कुआं मिला है। कुएं में झांकने पर पुलिस को कुछ संदिग्ध वस्तुएं और झोले नजर आईं। इस पर पुलिस ने कटिया डलवा कर संदिग्ध वस्तुएं बाहर निकलवाईं। पुलिस ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है।

गांव में दो आटा चक्कियां हैं। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद से बिकरू समेत आसपास गांवों लाइट काट दी गई है। इससे गांव व आसपास लगी सभी चक्कियां भी बंद हो गई हैं। ऐसे में लोग गेहूं नहीं पिसा पा रहे हैं। ऐसे में कई ग्रामीणों के सामने सिर्फ चावल खाकर पेट भरने के अलावा कोई उपाय नहीं है।

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