अगर बढ़ा प्रदूषण का स्‍तर तो बंद हो जाएंगे हॉट स्‍पॉट

अगर बढ़ा प्रदूषण का स्‍तर तो बंद हो जाएंगे हॉट स्‍पॉट

गैर सीएनजी चालित तमाम निजी वाहनों पर रोक और कृत्रिम बारिश जैसे उपायों के बाद एक और ‘अप्रभावी’ उपाय से प्रदूषण से जंग जीतने की तैयारी हो रही है। अहम सवाल यह है कि अप्रभावी उपाय जंग को धार कैसे दे पाएंगे? दरअसल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टास्क फोर्स ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) को सुझाव दिया है कि अगर दिल्ली में अब प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचा तो हॉट स्पॉट को हाई अलर्ट पर रखा जाएगा।

 

कैसे होगी हॉट स्‍पॉट की पहचान

दिल्ली-एनसीआर के सभी हॉट स्पॉट पर निर्माण कार्य संबंधी गतिविधियां और कोयले या बायोमास से चलने वाली औद्योगिक इकाइयां भी बंद रहेंगी। सवाल यह है कि हॉट स्पॉट की पहचान होगी कैसे? सीपीसीबी ने ईपीसीए को भेजे गए पत्र में वजीरपुर, मुंडका, नरेला, बवाना, आनंद विहार इत्यादि इलाकों को हॉट स्पॉट की संज्ञा दी है।

ये भी हैं हॉट स्‍पॉट

इसके अलावा हॉट स्पॉट उन जगहों को भी माना जा रहा है जहां प्रदूषण काफी अधिक बना रहता है। लेकिन, इसकी स्थिति अमूमन हर पंद्रह दिनों में बदलती रहती है। मसलन, नवंबर माह के शुरुआती दस दिनों में द्वारका और गुरुग्राम सबसे अधिक प्रदूषित थे, लेकिन अब दोनों जगहों पर प्रदूषण अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है।

एक पहलू यह भी है

एक अन्य अहम पहलू यह भी है कि दिल्ली में तो पर्याप्त मॉनिटरिंग स्टेशन लगे हुए हैं, लेकिन एनसीआर में इनकी संख्या मुश्किल से दो चार ही है। सूत्रों की मानें तो अभी दिल्ली-एनसीआर में मैन्यूअल व रियल टाइम मिलाकर कुल 94 मॉनिटरिंग स्टेशन लगे हुए हैं। वहीं फरवरी 2019 तक यह 141 हो जाएंगे। एनसीआर में साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम में भी सिर्फ दो जगहों पर ही एयर मॉनिटरिंग स्टेशन हैं। इसमें एक हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का स्टेशन लघु सचिवालय और सफर का मॉनिटरिंग स्टेशन सेक्टर-29 में है।

तो बढ़ सकती है चार साल उम्र 

भारत में वायु प्रदूषण से लोगों की उम्र पर पड़ने वाला प्रभाव धूमपान और टीबी जैसी बीमारी से भी ज्यादा है। यदि प्रदूषण को लेकर यहां विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों का पालन किया जाए, तो लोगों की उम्र में 4.3 साल तक की वृद्धि हो सकती है। मतलब भारत में औसत आयु 69 से बढ़कर 73 साल हो जाएगी।
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ताओं ने एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (एक्यूएलआइ) तैयार किया है। इसके अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण वैश्विक स्तर पर औसत आयु 1.8 साल तक कम हो गई है। अध्ययन के अनुसार भारत और चीन में औसत आयु में जो कमी आई है, उसमें से 73 फीसद कमी वायु प्रदूषण के कारण हुई है। इन दोनों देशों में दुनिया की 36 फीसद आबादी रहती है।

नशे से कम होती है लाइफ 

एक्यूएलआइ में औसत आयु पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर वायु प्रदूषण को दुनियाभर में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। दुनिया की 75 फीसद यानी करीब 5.5 अरब आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां वायु प्रदूषण डब्ल्यूएचओ के मानकों से ज्यादा है। सर्वाधिक प्रदूषण वाले देशों में यदि डब्ल्यूएचओ के मानकों का पालन किया जाए, तो वहां रहने वालों की उम्र औसतन एक साल बढ़ जाएगी।

तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर प्रदूषण के कारण औसत आयु में 1.8 साल, धूमपान के कारण 1.6 साल, शराब व अन्य नशे के कारण 11 महीने, अशुद्ध पानी व गंदगी के कारण सात महीने और एड्स के कारण चार महीने की कमी आई है। आतंकवाद व अन्य युद्ध के कारण औसत आयु 22 दिन तक कम हुई है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि प्रदूषण से खुद को बचाने के लिए निजी स्तर पर व्यक्ति कुछ खास नहीं कर सकता।

हाई कोर्ट ने लगा दी रोक

पर्यावरण से जुड़ी पर्यावरण एवं वन मंत्रलय की दो अधिसूचनाओं के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। 14 एवं 15 नवंबर 2019 को जारी की गई अधिसूचना में 50 हजार स्क्वायर मीटर के बिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण संबंधी स्वीकृति लेने के नियम में छूट दे दी थी। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र, शैक्षिक संस्थान और अस्पताल के मामले में यह दायरा 1.50 लाख स्क्वायर मीटर का होगा।

जिंदगी की रक्षा करने के मूल अधिकार का उल्लंघन 

मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई की। इसमें कहा गया है कि यह अधिसूचना जिंदगी की रक्षा करने के मूल अधिकार का उल्लंघन है। इस पर पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए पर्यावरण मंत्रलय से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी 2019 को होगी।
दायर याचिका में गैर सरकारी संगठन सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट ने आरोप लगाया कि अधिसूचना निरंतर विकास की अवधारणा का उल्लंघन है।
याचिका में मांग की गई कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह पर्यावरण के नियमों को मनमाने तौर पर नहीं बदले। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई दोनों अधिसूचनाओं का असर राजधानी सहित पूरे देश के पर्यावरण पर पड़ेगा।

You Might Also Like