मुख्यमंत्री ने जनपद वाराणसी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया व बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित की


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित नागरिक स्वयं को अकेला न समझें। डबल इंजन सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सरकार हर प्रकार का सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 24 घण्टे कण्ट्रोल रूम के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी प्राप्त की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाने का कार्य सुनिश्चित किया जाएगा। राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो तथा प्रभावित लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित परिवार को सुरक्षित रखना, आवश्यक राहत उपलब्ध कराना और सामान्य जनजीवन को शीघ्र बहाल करना है।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद वाराणसी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर विद्या विहार इण्टर कॉलेज में बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष भी उन्हें इसी विद्यालय परिसर में आकर राहत कार्यों की समीक्षा करने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने का अवसर मिला था। आज उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से बातचीत की है और स्वयं राहत सामग्री का वितरण किया है। शासन-प्रशासन द्वारा प्रभावित लोगों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रतिवर्ष जब गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है, तो वरुणा नदी में बैक फ्लो के कारण निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। वर्तमान में बरसात का मौसम है। लगभग 10 वर्ष पूर्व इसी मौसम में प्रदेश के 40 से 45 जनपद बाढ़ अथवा भीषण जलभराव से प्रभावित होते थे। इससे जनजीवन, आवागमन एवं सामान्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होती थीं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 09 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में प्रदेश में प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक कार्य हुए हैं। इन कार्यों के परिणाम वाराणसी सहित पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। काशी आज नई काशी के रूप में देश-दुनिया के सामने अपनी पहचान बना रही है। काशी की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। काशी विश्वनाथ धाम, घाटों के पुनर्विकास, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट, सड़कों के चौड़ीकरण, रिंग रोड सहित जनसुविधाओं के विकास के कार्य किए गए हैं। इसके साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए भी प्रभावी उपाय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एक समय प्रदेश के 40 से 45 जनपद प्रत्येक वर्ष बाढ़ की समस्या से प्रभावित होते थे। अनेक जनपदों में जलभराव के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज प्रदेश सरकार की प्रभावी बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था के परिणामस्वरूप स्थिति में व्यापक सुधार आया है। वर्तमान में लगभग 14 ऐसे जनपद हैं, जहां बाढ़ अथवा जलभराव की स्थिति बनी है। इन सभी क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की जा रही है। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की जा रही है तथा जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता युद्ध स्तर पर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों को व्यापक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। पहले की सरकारों के समय प्रभावित परिवारों को सीमित राहत सामग्री मिलती थी, जबकि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में वर्तमान डबल इंजन सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत राहत पैकेज तैयार किया गया है। प्रत्येक प्रभावित परिवार को लगभग 26 प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें लाई, चना, भुना चना, चीनी, बिस्किट, माचिस, मोमबत्ती, नहाने का साबुन, बाल्टी, तिरपाल, आटा, चावल, अरहर की दाल, आलू, हल्दी, मिर्च एवं अन्य मसाले, रिफाइण्ड अथवा सरसों का तेल, नमक, सैनिटरी पैड, कपड़े धोने का साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा, डिस्पोजेबल बैग, मग तथा डेटॉल अथवा सैनिटाइजर जैसी आवश्यक सामग्री शामिल हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि आपदा की स्थिति में किसी भी परिवार को भोजन, आवश्यक सामग्री अथवा मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार प्रभावित किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल क्षति का सर्वे पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसानों को शीघ्र राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि वाराणसी में 1,129 किसान प्रभावित हैं और लगभग 131 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हुई है। सम्बन्धित क्षेत्रों में फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू एवं अन्य विषैले जीव-जन्तुओं के काटने की घटनाएं हो सकती हैं। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष, मकान गिरने, बिजली गिरने अथवा डूबने जैसी घटनाओं से भी जनहानि की सम्भावना रहती है। ऐसी सभी घटनाओं को आपदा राहत के दायरे में लेते हुए प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर सम्बन्धित परिवार को अगले 24 घण्टे के भीतर आपदा राहत निधि से अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यदि किसी गरीब परिवार का मकान बाढ़ में बह गया है, टूट गया है अथवा आग लगने से नष्ट हो गया है, तो ऐसे परिवारों को पात्रता के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। अच्छी सरकार वही है जो गरीबों के हित में योजनाएं बनाती है। भ्रष्टाचार एवं लूट-खसोट पर रोक लगाती है और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक उसका अधिकार पहुंचाती है। सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। प्रत्येक पात्र नागरिक को उसका अधिकार उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वाराणसी में वर्तमान में 16 वॉर्डों में 567 परिवार प्रभावित हुए हैं, जिनमें 2,486 नागरिक निवास करते हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 21 राहत शिविरों में व्यवस्था की गई है। इन राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों के लिए एन0डी0आर0एफ0, पी0ए0सी0 एवं पुलिस की टीमें लगातार सक्रिय हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 24 घण्टे निगरानी एवं बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाढ़ के बाद जलजनित एवं अन्य संक्रामक बीमारियों की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके दृष्टिगत प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैम्प लगाए जा रहे हैं। जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन पात्र लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं हैं, उन्हें आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की कार्यवाही भी की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी की जाए तथा किसी भी प्रकार की बीमारी फैलने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि बाढ़ का पानी उतरते ही प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल साफ-सफाई, सैनिटाइजेशन एवं आवश्यक दवाओं का छिड़काव युद्ध स्तर पर कराया जाए। इसका उद्देश्य जलजनित एवं विषाणुजनित बीमारियों की रोकथाम करते हुए सामान्य जनजीवन को शीघ्र बहाल करना है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार मिलकर प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्य कर रही हैं। काशी के सांसद के रूप में प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन एवं नेतृत्व पूरे देश को प्राप्त हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम स्थल पर स्वतंत्रता सेनानी श्री जग्गू राम मौर्य की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। मुख्यमंत्री जी ने बाढ़ राहत शिविर का स्थलीय निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं को देखा। उन्होंने वहां मौजूद नौनिहालों को स्नेह देते हुए उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री अनिल राजभर ने बाढ़ राहत शिविर में उपस्थित समूह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि जब कभी बाढ़ से लोग प्रभावित होते हैं, तो मुख्यमंत्री जी द्वारा बाढ़ राहत शिविर का आयोजन किया जाता है। प्राकृतिक आपदा में हमारी सरकार जनता के दरवाजे पर खड़ी होती है। शिवपुर विधानसभा के लोगों को लगातार मुख्यमंत्री जी का आशीर्वाद प्रतिवर्ष मिल रहा है।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री रवीन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 दयाशंकर मिश्र ’दयालु ’, एम0एस0एम0ई0 राज्य मंत्री श्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



