भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान के वाराह अवतार का वर्णन

नवाबगंज (गोण्डा) 23 मार्च। क्षेत्र के लौव्वाबीरपुर गांव के डिहवा मजरे में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ। मुख्य यजमान सूर्यलाल तिवारी एवं शिव देवी ने व्यास पीठ का विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती कर कार्यक्रम की शुरुआत कराई।
कथा व्यास पं. मनीष चंद्र त्रिपाठी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में भगवान के वाराह अवतार के साथ हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु की कथा को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि हिरण्याक्ष ने अपने अहंकार में आकर पृथ्वी को पाताल में ले जाकर सृष्टि का संतुलन बिगाड़ दिया था। तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर उससे भीषण युद्ध किया और पृथ्वी को पुनः स्थापित कर सृष्टि की रक्षा की।
कथा व्यास ने आगे हिरण्यकशिपु का प्रसंग जोड़ते हुए बताया कि उसने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया और स्वयं को ही सर्वोच्च मानने लगा। उसने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दीं, लेकिन सच्ची भक्ति के सामने उसका अत्याचार टिक नहीं सका।
अंततः भगवान नरसिंह रूप में प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु का वध कर यह सिद्ध कर दिया कि भक्त की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, अंत में भक्ति और सत्य की ही विजय होती है। मनुष्य को सदैव धर्म, विश्वास और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए।
इस दौरान संत कबीर नगर में एसडीएम पद पर कार्यरत ह्रदयराम तिवारी, हरिमंगल तिवारी, विश्वामित्र तिवारी, बृजेन्द्र मिश्र, दीपक देव तिवारी, विनोद तिवारी, लवी, लकिन, अजय तिवारी, गिरिजेश त्रिपाठी, डॉ. विनोद त्रिपाठी, अनिल तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



