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आलू निर्यात की नीति बनाने की उठी मांग

 मथुरा । आलू की खेती को किसानी में दांव लगाने जैसा माना जाता है। आलू की खेती कई बार उत्पादकों को अच्छा लाभ दे जाती है तो कई बार बडा घाटा। यह माना जाता है कि आलू के घाटे को आलू ही पूरा कर सकता है। यानी घाटा और मुनाफा दोनों ही मोटे होते हैं। लेकिन इस तरीके में कई बार आलू किसान आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाते हैं। अब मांग उठ रही है कि आलू निर्यात को लेकर किसान कोई ठोस नीति तैयार करे जिससे किसान को कम से कम उसका लागत मूल्य हर हाल में मिल जाए। भारतीय किसान यूनियन भानु गुट ने जिले में आलू किसानों की बहाली पर चिंता जताते हुए आलू निर्यात की नीति बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसानों को खेतों से आलू का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है जिसके कारण किसानों को मजबूरी में आलू को कोल्डस्टोरेज में रखना पड़ेगा। भाकियू के बल्देव कैम्प कार्यालय पर हुई बैठक में प्रदेश महासचिव रामवीर सिंह तोमर ने कहा कि आलू खुदाई शुरू हो गई है लेकिन सरकारी खरीद केंद्र कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुदाई के वक्त सरकार आलू की एमएसपी 500 रुपये प्रति कुंतल से भी कम तय करती रही है। जबकि एक कुंतल आलू की उपज की लागत ही 1100 से 1200 रुपये आती है। सरकार द्वारा 500 रुपये प्रति कुंतल से भी कम एमएसपी घोषित होने पर किसान अपना आलू कैसे बिक्री कर सकता है? राष्ट्रीय प्रवक्ता हरेश ठेनुआ, जिला अध्यक्ष देवेन्द्र पहलवान ने कहा कि कोल्डस्टोरेज मालिकों ने चुपके से कोल्ड का भाड़ा 20 रुपये तक बढ़ा दिया है। जिससे किसानों पर अतिरिक्त खर्चा बढ़ना तय है। उन्होंने कहा कि कोल्डस्टोरेज मालिकों ने सादा आलू का भाड़ा 250 रुपये तो सुगर फ्री का भाड़ा 290 रुपये प्रति कुंटल तक कर दिया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि बुबाई के समय सरकार से किसानों ने बीज के रूप में जो आलू 2400 रुपये से लेकर 3000 हजार रुपये कुंतल में खरीदा था, खुदाई के वक्त उसे कोई 12 सौ रुपये से ज्यादा में खरीदने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि एक कुंतल फसल की पैदावार करने पर किसानों को 1200 रुपये की लागत आती है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर आलू की पैदावर को देखते हुए आलू निर्यात की कोई नीति तक नहीं है। बैठक में ठा रमेश सिकरवार, शकुंतला माहौर, श्यामपाल सिंह, जगदीश रावत, कुंतभोज रावत, गोपाल सिकरवार, विक्रम चैधरी, रामेश्वर सिकरवार, कुशलपाल, भोला सिकरवार, अजयपाल, सौनवीर, वेदप्रकाश तोमर आदि रहे।

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