मानव सम्पदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति विवरण न देने वाले 47,816 कर्मियों पर सख्ती, पदोन्नति और एसीपी पर रोक के निर्देश
लखनऊ, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश शासन ने मानव सम्पदा पोर्टल पर नियमानुसार चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज न करने वाले राज्य कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित अवधि तक संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कार्मिकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें पदोन्नति, एसीपी और सतर्कता अनापत्ति प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जाए।
कार्मिक अनुभाग-5 से जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में जारी शासनादेशों के माध्यम से सभी राज्य कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के अंतर्गत अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अनिवार्य रूप से 31 जनवरी 2026 तक मानव सम्पदा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि जो कर्मचारी निर्धारित तिथि तक विवरण अपलोड नहीं करेंगे, उनका जनवरी 2026 का वेतन फरवरी 2026 में निर्गत नहीं किया जाएगा और संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी निभानी होगी।
इसके बावजूद राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक 47,816 कर्मचारियों द्वारा पोर्टल पर संपत्ति विवरण दर्ज नहीं किया गया। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए ऐसे कर्मचारियों को अंतिम अवसर प्रदान किया है। 26 फरवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक की अवधि में वे अपने चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं, किंतु यह अवसर कड़े प्रतिबंधों के अधीन होगा।शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा तक विवरण न देने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्यवाही की जाएगी। ऐसे कर्मचारियों के वर्तमान चयन वर्ष में पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा तथा यदि वे इस वर्ष एसीपी के पात्र हों तो उन्हें एसीपी का लाभ भी नहीं दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति अथवा अन्य संवेदनशील दायित्वों के लिए सतर्कता अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी नहीं किया जाएगा।यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा विवरण अपलोड न करने के बावजूद जनवरी 2026 का वेतन आहरित किया गया है तो संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही की जाएगी। विभागाध्यक्षों तथा संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव को इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 10 मार्च 2026 तक अपना संपत्ति विवरण पोर्टल पर दर्ज कर देंगे, उनका जनवरी और फरवरी 2026 का वेतन नियमानुसार निर्गत किया जाएगा। आदेश में सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है।शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है और इसकी प्रमाणिकता राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर सत्यापित की जा सकती है। शासन की इस सख्ती को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



