जम्मू कश्मीर

एलओसी पार से आई दो दुल्हन बनीं कश्मीर में सरपंच

आरिफा और दिलशादा जब अपने परिजनों की मर्जी के बिना और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ की आंखों से बचते हुए अपने-अपने पति के साथ एलओसी पार से निकलीं थी तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने ससुराल कश्मीर में सिर्फ घर परिवार ही नहीं, पूरे इलाके की तरक्की और खुशहाली की कुंजी भी संभालेंगी।

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आज ये दोनों एलओसी पार से लौटे दो पुराने जिहादियों की पत्नियां नहीं रह गई हैं, अब वे अपनी-अपनी पंचायत की सरपंच हैं। आरिफा और दिलशादा उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा में प्रिंगरू और खुमरियाल में निर्विरोध सरपंच चुनी गई हैं। राज्य में 17 नवंबर से नौ चरणों में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए मतदान शुरू हो रहा है।

35 वर्षीय आरिफा एलओसी के साथ सटी लोलाब घाटी के अंतर्गत खुमरियाल की सरपंच बनी है। उसका पति गुलाम मोहम्मद मीर वर्ष 2001 में आतंकी बनने के लिए एलओसी पार गुलाम कश्मीर चला गया था। वहां एक जिहादी फैक्टरी में कुछ दिन रहने के बाद उसे अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने आतंकवाद को त्यागकर मुजफ्फराबाद में एक नयी जिंदगी शुरू की। उसने वहां एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया और इसी दौरान उसने वहां आरिफा के साथ निकाह कर लिया।

आरिफा मुजफ्फराबाद के पास स्थित पलांदरी गांव की रहने वाली है। वर्ष 2010 में राज्य में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सत्तासीन नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार द्वारा आतंकियों के लिए घोषित घर वापसी अथवा सरेंडर पालिसी से प्रभावित होकर गुलाम मोहम्मद मीर ने जब कश्मीर लौटने का फैसला किया तो आरिफा बेगम ने मायका छोड़ अपने पति के साथ ही रहने का फैसला किया। अपने बच्चों संग आरिफा और गुलाम मोहम्मद मीर ने गुलाम कश्मीर में सक्रिय आतंकी सरगनाओं और आइएसआई के एजेंटों की नजर से बचते हुए पासपोर्ट का जुगाड़ किया। इसके बाद वह नेपाल पहुंचे और नेपाल से कश्मीर।

कश्मीर पहुंचने के बाद आरिफा और गुलाम मोहम्मद मीर को सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ से गुजरना पड़ा। गुलाम मोहम्मद को कुछ दिन जेल में भी बिताने पड़े। गुलाम मोहम्मद मीर ने कहा कि मेरी बीबी आरिफा ने खुमरियाल बी पंचायत में पंच और सरपंच दोनों पदों के लिए चुनाव लड़ा है, लेकिन उसके खिलाफ न पंच हल्के में कोई उम्मीदवार था और न सरपंच के चुनाव में। वह पंच और सरपंच दोनों ही चुनाव निर्विरोध जीती है। वह सरपंच का ओहदा संभालेगी।

खुमरियाल से करीब 30 किलोमीटर दूर प्रिंगरू हल्के में भी सरंपच महिला ही चुनी गई है और वह भी एक आतंकी की दुल्हन बनकर ही करीब दो साल पहले सीमा पार से इस तरफ आई है। उसक नाम दिलशादा है और उसके पति का नाम मोहम्मद यूसुफ बट। दिलशादा पाकिस्तान में कराची की रहने वाली है। यूसुफ बट से उसकी मुलाकात कराची में हुई थी और उसके बाद दोनों ने निकाह कर लिया। दिलशादा भी निर्विरोध सरपंच बनी है।

 

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