मायावती ने 70वें जन्मदिन पर किया बड़ा राजनीतिक एलान, कहा—बसपा अब सभी चुनाव अकेले लड़ेगी, 2027 में यूपी की सत्ता में वापसी तय

लखनऊ,(आरएनएस ) । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश और प्रदेश की राजनीति को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब बसपा उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी और किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। मायावती ने कहा कि गठबंधन का अनुभव पार्टी के लिए लाभकारी नहीं रहा, बल्कि इससे बसपा का जनाधार और वोट प्रतिशत प्रभावित हुआ है।मायावती ने कहा कि उनका जन्मदिन बसपा कार्यकर्ताओं द्वारा पूरे देश में “जनकल्याणकारी दिवस” के रूप में सादगी के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर पार्टी के लोग बहुजन समाज के हित में शुरू की गई योजनाओं और आंदोलनों की जानकारी जनता तक पहुंचाते हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और देशवासियों को नए वर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह वर्ष सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और तरक्की लेकर आए।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के चार कार्यकालों के दौरान गरीबों, मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, युवाओं, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के लिए ऐतिहासिक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं। ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू की गईं, जिससे समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति में वास्तविक सुधार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद की सरकारों ने बसपा की योजनाओं की नकल तो की, लेकिन नीयत और सोच सही न होने के कारण जनता को उनका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया।मायावती ने कहा कि बसपा सरकारों के दौरान महात्मा ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर और कांशीराम जैसे महापुरुषों को पूरा सम्मान दिया गया। उनके नाम पर स्मारक, पार्क और ऐतिहासिक स्थल बनाए गए, जिससे बहुजन समाज में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार ने सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति पर चलते हुए सभी वर्गों के हितों का समान रूप से ध्यान रखा।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और आम जनता, विशेषकर दलितों और अन्य वंचित वर्गों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। मायावती ने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और सपा की सरकारों में बहुजन समाज को अपेक्षित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिली। उन्होंने सपा शासनकाल की आलोचना करते हुए कहा कि उस दौर में अपराधियों, माफियाओं और अराजक तत्वों का बोलबाला रहा और दलितों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए।मायावती ने यह भी कहा कि बसपा सरकारों के दौरान किसी भी धर्म, वर्ग या समाज के साथ भेदभाव नहीं किया गया। मंदिर, मस्जिद, चर्च सभी सुरक्षित रहे और प्रदेश में कभी भी दंगा-फसाद जैसी स्थिति नहीं बनने दी गई। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिया गया, गन्ना किसानों की आय बढ़ाई गई और युवाओं को बिना रिश्वत सरकारी नौकरियां दी गईं।राजनीतिक रणनीति पर बोलते हुए मायावती ने साफ किया कि गठबंधन में बसपा का दलित वोट तो पूरी तरह ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन सहयोगी दलों का वोट बसपा को नहीं मिलता, जिससे पार्टी को नुकसान होता है। इसी अनुभव के आधार पर पार्टी ने निर्णय लिया है कि अब किसी भी चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी अपनी जातिवादी मानसिकता छोड़कर वास्तव में बसपा के पक्ष में वोट ट्रांसफर करने की स्थिति में होगी, तभी भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है।उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और सर्वसमाज के लोग बसपा को पहले से कहीं अधिक समर्थन देंगे और उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। मायावती ने कहा कि 2007 की तरह ही अगली बसपा सरकार भी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर काम करेगी।प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करें, जनता के बीच जाकर बसपा सरकारों के कार्यों को पहुंचाएं और किसी भी भ्रम या दुष्प्रचार से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि यही उनके जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से सबसे बड़ा उपहार होगा।



