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हिन्दू एक पूजा पद्धति नहीं, बल्कि शाश्वत जीवन मूल्य है : चिन्मयानंद  

अयोध्या।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पलिया माफ़ी मिल्कीपुर ब्लॉक जिला अयोध्या में एक भव्य एवं विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन अत्यंत उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में लगभग पांच सौ की संख्या में हिंदू समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मातृशक्ति, युवा वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना और राष्ट्र के प्रति सामाजिक दायित्व का बोध कराना रहा।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह विभाग प्रचारक शैलेन्द्र कुमार रहे। उन्होंने अपने विचारप्रधान और प्रेरक संबोधन में संघ के शताब्दी वर्ष के महत्व को रेखांकित करते हुए हिंदू समाज को समरसता और पंच परिवर्तन के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संघ के सौ वर्ष केवल एक संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, राष्ट्र को सशक्त बनाने और भारतीय जीवन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की निरंतर साधना हैं। शैलेन्द्र ने कहा कि आज समाज जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे सामाजिक विभाजन, सांस्कृतिक विस्मृति और नैतिक मूल्यों में गिरावट, उनका समाधान एक समरस और जागरूक हिंदू समाज के निर्माण में निहित है। उन्होंने संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन – स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ये केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने योग्य जीवन मूल्य हैं। प्रमुख अतिथि महंत चिन्मयानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में समावेश, करुणा और सहअस्तित्व का भाव निहित है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सुदृढ़ करता है। संघ ने उपेक्षा, विरोध और संघर्ष के अनेक दौर देखे हैं, फिर भी वह निरंतर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ता रहा है। भविष्य के भारत के निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आधार बनाकर कार्य करने का आह्वान किया गया। मातृशक्ति वक्ता शिवानी त्रिवेदी ने कुटुंब प्रबोधन पर बल देते हुए  कहा कि प्रत्येक घर में घ् और स्वस्तिक जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान, तुलसी का पौधा, स्वदेशी परिधान और मातृभाषा में संवाद होना चाहिए।

उन्होंने भोजन के समय मोबाइल के स्थान पर पारिवारिक संवाद को प्राथमिकता देने, परिवार के साथ धार्मिक यात्राएँ करने और प्रातःकाल धरती माता के चरण स्पर्श जैसे संस्कारों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।  हर चीज घर से शुरू होती है। जब परिवार टूटता है तो संस्कृति टूटती है और असामंजस्यता का जीवन शुरू होता है। हमें हिंदुओं को हिंदुत्व में बदलना होगा।’   उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेना हमारा सौभाग्य है और प्रत्येक परिवार को वर्ष में कम से कम एक बार धार्मिक स्थलों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवार को एकजुट रखने और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्कार देने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नागरिक कर्तव्यों और पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए संस्कार भारती प्रान्त उपाध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव कहा कि लाल बत्ती पर रुकना, रेल यात्रा में टिकट लेना, जल का सीमित उपयोग करना, पॉलीथिन का त्याग करना और प्रदूषण को रोकना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे अनुशासन ही बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बनते हैं। संगठित हिंदू समाज ही समर्थ भारत की नींव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्वन किसी जाति तक सीमित है और न ही केवल पूजा पद्धति तक, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है, जिसका मूल सूत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना काल में पूरी दुनिया को निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराकर मानवता का उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि हिंदुत्व मानवता, करुणा, प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण पर आधारित एक सनातन विचारधारा है। संगठित, स्वाभिमानी और संस्कारयुक्त समाज ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर कर सकता है। कार्यक्रम का संचालन सह खंड कार्यवाह विशाल मिश्रा द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन जितेंद्र शर्मा ने किया। इस अवसर सह जिला कार्यवाह आनंद सोनी,विभाग कार्यवाह रमाशंकर गुप्ता ,सरोज मिश्रा,मयूरी तिवारी, पुष्कर दत्त तिवारी,पुष्कर मिश्रा, विनोद तिवारी, दिव्यांश,नीतू पांडेय,पंकज मिश्रा मधु पाठक आदि स्वयंसेवक कार्यकर्ता उपस्थित रहे

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