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असंद्रा पुलिस पर पीड़ित से 14 हजार रुपये छीनने का आरोपपीड़ित ने एसपी से लगाई इंसाफ की गुहार, कार्रवाई में भेदभाव को लेकर उठे सवाल

बाराबंकी। जिले के असंद्रा थाना क्षेत्र के ग्राम मंझौती बेलपुर निवासी जैराम ने पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, वर्तमान में वह जयराम बाचा कासरी दास कुटी पर रहकर अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रहा है। इससे पहले वह एक धर्मशाला में रहता था, लेकिन कुछ लोगों द्वारा वहां से निकाल दिए जाने के बाद उसकी स्थिति और खराब हो गई। जैराम ने बताया कि रहने के लिए टीन शेड बनवाने के उद्देश्य से उसने अपना गेहूं बेचकर व अन्य माध्यमों से 14,000/- की रकम जुटाई थी। आरोप है कि 6 अप्रैल 2026 को जब वह अपने एक साथी के साथ यह रकम लेकर टीन खरीदने जा रहा था, तभी कल्याणी नदी पुल के पास एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को चौकी इंचार्ज बताया। पीड़ित का कहना है कि उस व्यक्ति ने उन्हें रोककर जबरन तलाशी ली और जेब में रखे पूरे 14,000/- निकाल लिए। पीड़ित के अनुसार, पैसे छीनने के बाद उसे दिलावलपुर चौकी ले जाया गया, जहां मौजूद पुलिसकर्मियों से जब उसने चौकी इंचार्ज के बारे में पूछा तो एक दीवान ने खुद को चौकी प्रभारी बताया और कहा कि कोई पैसा नहीं लिया गया है। जैराम का आरोप है कि इस दौरान उसका मोबाइल फोन भी छीनकर फेंक दिया गया और उसे गाली-गलौज करते हुए डराया-धमकाया गया। उसे चेतावनी दी गई कि यदि उसने किसी का नाम लिया या शिकायत की, तो उसे झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाएगा। पीड़ित ने आरोप लगाया कि बाद में उसे केवल 500 देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई और कहा गया कि शिकायत न करे, उसे टीन सेट का सामान दिलवा दिया जाएगा। इसके बाद भी उसे कई बार चौकी दिलावलपुर बुलाया गया, जहां घंटों बैठाकर बार-बार यही कहा जाता रहा कि वह शिकायत न करे। पीड़ित का कहना है कि लगातार झूठे आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक न तो उसकी 14,000/- की रकम वापस की गई और न ही कोई मदद की गई। जैराम का आरोप है कि संबंधित चौकी प्रभारी और पुलिसकर्मियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसके साथ अवैध वसूली, गाली-गलौज, धमकी, मानसिक उत्पीड़न और धोखाधड़ी की है। उसने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का कानून और प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। एक ओर जहां जैराम की शिकायत के चार दिन बाद भी लूट जैसे गंभीर आरोप में एफआईआर दर्ज नहीं हुई, वहीं दूसरी ओर असंद्रा थाना क्षेत्र के ही एक कॉलेज प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने बेहद तेजी दिखाई। राम खेलावन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधक आलोक पांडेय द्वारा 8 अप्रैल 2026 को कॉलेज की ही एक महिला शिक्षक पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने उसी दिन रात 9रू05 बजे मुकदमा दर्ज कर लिया और अगले ही दिन सुबह आरोपी महिला और उसके कथित साथी को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई की तेजी को लेकर इलाके में चर्चाएं तेज हैं और लोग पुलिस के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, असंद्रा थाना पुलिस की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है। बताया जाता है कि नवंबर 2025 में दो सगी बहनों के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में भी पुलिस पर आरोपियों से साठगांठ और पीड़ित परिवार को डराने-धमकाने के आरोप लगे थे। बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी तरह एक अन्य मामले में विवाहिता द्वारा दुष्कर्म का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किए जाने से परेशान होकर जहर खाने की घटना में भी पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगे थे, जिसमें पीड़िता की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके अलावा अवैध लकड़ी कटान और खनन माफियाओं से साठगांठ के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में पीड़ित ने जहां प्ळत्ै पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है वहीं एसपी अर्पित विजयवर्गीय को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अपनी छीनी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है।

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