LIVE TVउत्तर प्रदेशबड़ी खबर

अपने यादव कार्यकर्ताओं की भी नहीं रही सपा, राजभर ने अखिलेश को घेरा

आजमगढ़ में बूथ अध्यक्ष राहुल यादव की कथित पिटाई को लेकर सपा अध्यक्ष पर साधा निशाना

कहा- मुस्लिम प्रेम में सही-गलत भूले अखिलेश, अपने कार्यकर्ता की पिटाई पर भी चुप

राजभर का दावा- यादव समाज सब देख रहा, विधानसभा चुनाव में सपा को देगा जवाब

7 सितम्बर, लखनऊ। सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा में यादव कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। आजमगढ़ में सपा बूथ अध्यक्ष राहुल यादव की कथित पिटाई का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता वर्षों से पार्टी का झंडा-बैनर उठाकर जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं, सपा नेतृत्व अब उनके साथ भी खड़ा नहीं है।

राजभर ने सोशल मीडिया पर भोजपुरी में किए पोस्ट में आरोप लगाया कि राहुल यादव की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने सपा विधायक नफीस अहमद के बजाय पार्टी के ही किसी दूसरे नेता को पसंद किया। इसी वजह से उन्हें दिनदहाड़े पिटवाया गया। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने मामले में चुप्पी साध रखी है।

उन्होंने अखिलेश पर मुस्लिम नेताओं के प्रति पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम प्रेम में सपा अध्यक्ष को सही और गलत का फर्क दिखाई नहीं दे रहा है। जिस यादव समाज और जमीनी कार्यकर्ताओं को सपा अपना मजबूत आधार मानती रही है, उन्हीं कार्यकर्ताओं के सम्मान और सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है।

राजभर ने कहा कि यह केवल एक कार्यकर्ता की पिटाई का मामला नहीं है, बल्कि इससे सपा के भीतर कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। जब पार्टी के बूथ अध्यक्ष के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो सामान्य कार्यकर्ताओं की स्थिति समझी जा सकती है।

उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रदेश का यादव समाज इन घटनाओं को देख और समझ रहा है। खासकर आजमगढ़ का यादव समाज इसका जवाब देने के लिए तैयार बैठा है। राजभर ने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि कम से कम उन कार्यकर्ताओं के तो सगे हो जाएं, जो वर्षों से सपा का झंडा उठाते आ रहे हैं। चुनाव में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का हिसाब जरूर होगा।
………………………………………………………………………………………..
मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर यूपी के कई जिलों में लगे पोस्टर

पोस्टरों पर लिखा- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’, फिर चर्चा में आया 2013 का दंगा

लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टर

दंगों में 60 से अधिक लोगों की गई थी जान, 50 हजार से ज्यादा लोगों को छोड़ना पड़ा था घर

दंगों के बीच सैफई महोत्सव को लेकर भी घिरी थी अखिलेश सरकार, विपक्ष ने उठाए थे सवाल

कुछ जिलों में पोस्टर लगाने को लेकर सपा कार्यकर्ताओं से झड़प, गरमाई सियासत

7 सितंबर, लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा और तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।’

पोस्टर लगाए जाने के दौरान कुछ जिलों में विवाद की स्थिति भी बनी। पोस्टरों का विरोध करने पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं और इन्हें लगाने वाले लोगों के बीच कहासुनी और झड़प की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पोस्टरों और उनके विरोध ने दंगों की बरसी पर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि हिंसा पर नियंत्रण के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी।

उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार थी। कानून-व्यवस्था संभालने और समय रहते हिंसा रोकने में नाकामी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। सपा सरकार पर दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप भी लगे थे, जिन्हें पार्टी खारिज करती रही है।

दंगों के बाद राहत शिविरों और विस्थापित परिवारों की स्थिति को लेकर भी तत्कालीन सरकार विपक्ष के निशाने पर रही थी। वहीं, उस दौर में सैफई महोत्सव को लेकर भी अखिलेश सरकार की आलोचना हुई थी। विपक्ष ने इसे दंगा पीड़ितों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठाए थे।

अब 13 साल बाद दंगों की बरसी पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगे पोस्टरों और उन्हें लेकर हुई झड़पों ने मुजफ्फरनगर दंगों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

Related Articles

Back to top button