तहसील और गांव स्तर तक पहुंचेगी ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और उनसे जुड़े कारीगरों को पहचान दिलाने के लिए ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना को तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। इससे स्थानीय व्यंजनों को बाजार और ब्रांडिंग मिलेगी तथा हलवाई, कारीगर और घरों में पारंपरिक पाक कला को आगे बढ़ाने वाले परिवार रोजगार और आय के नए अवसरों से जुड़ सकेंगे। सरकार इस क्षेत्र की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मिलित हुए, जहां उन्होंने योजना से जुड़े आठ दक्ष कारीगरों जगदीश यादव, संदीप कुमार, राकेश कुमार, ब्रजेश कश्यप, बलराम गुप्ता, नीलू कुमार, शिवानी मवई और श्रवण लाल को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस मंच से प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के कारीगरों, हलवाई परिवारों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को पहचान मिल रही है।
75 जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को पहचान दिलाने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश के पारंपरिक उद्यमों को कृषि के साथ जोड़कर आर्थिक ताकत बनाने की दिशा में काम शुरू किया गया। इसी सोच के साथ 2018 में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना शुरू की गई। पहले 75 में से 58 जिलों में विशिष्ट उत्पादों की पहचान हुई थी। अब सभी 75 जनपदों के एक-एक विशेष उत्पाद को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश से करीब ₹2 लाख करोड़ के उत्पादों का निर्यात हो रहा है। प्रदेश के लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग भी मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में खान-पान और स्वाद की अपनी विशिष्ट परंपरा है। पिछले तीन-चार वर्षों में इन व्यंजनों की पहचान के लिए सर्वे कराया गया। इसके आधार पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना शुरू की गई। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री के हाथों इसका शुभारंभ हुआ था। अब इसे और व्यापक बनाते हुए तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक ले जाने की तैयारी है, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय व्यंजनों और कारीगरों को मंच मिल सके।
बलिया के बाटी-चोखा से जौनपुर की इमरती तक अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और अलग-अलग जिलों के विशिष्ट पकवान इसकी मिसाल हैं। घरों में माताओं, बहनों, दादियों और नानियों से सीखी गई पाक कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इस हुनर को उचित मंच, पैकेजिंग, तकनीक और बाजार से जोड़कर बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है।
बच्चियों को मंच पर बुलाकर भावुक हुए मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बच्ची का जिक्र किया, जो अपनी मां के हाथों बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट लेकर उनसे मिली थी। बच्ची ने उत्साह के साथ मुख्यमंत्री को यह नमकीन भेंट की और बताया कि उसकी मां इसे घर पर बनाती और बेचती हैं। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने बच्ची और उसके साथ मौजूद दूसरी बच्ची को मंच पर बुलाया और उनके उत्साह की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों में बनने वाले ऐसे उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ दिया जाए तो वे बड़े बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने संबंधित विभाग और आयोजक संस्थान से ऐसे कारीगरों और परिवारों को प्रोत्साहित करने की अपील की।
कारीगरों को ₹5 लाख से ₹20 लाख तक वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और ऐसे परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना लागू की है। इसके तहत पात्र लोगों को शुरुआती तौर पर ₹5 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके साथ सब्सिडी का भी प्रावधान है। योजना के तहत सहायता की राशि को आगे बढ़ाकर ₹7.5 लाख और ₹10 लाख तक तथा बड़े व्यवसाय के लिए ₹20 लाख तक की सुविधा देने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और हुनर रखने वाले परिवार, महिलाएं और स्वयं सहायता समूह इस माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। प्रदेश में इतना बड़ा बाजार उपलब्ध है कि स्थानीय व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को प्रोत्साहित करके बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया जा सकता है। उन्होंने बुलंदशहर की ‘अचार वाली दीदी’ का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने ₹500 उधार लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया और आज 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
शुद्धता और गुणवत्ता से ही बनेगी व्यंजनों की पहचान
मुख्यमंत्री ने कारीगरों और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों से शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यवसाय की पहली शर्त शुद्धता है। अधिक मुनाफे के लिए मिलावट या शॉर्टकट अपनाने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और पारंपरिक पाक कला की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। गुणवत्ता बनाए रखी जाएगी तो देश-दुनिया के बाजार में इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
उन्होंने भारतीय परंपरा में अन्न के सम्मान और विविध व्यंजनों की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ स्थानीय हुनर को सम्मान देने और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को आगे बढ़ाने का माध्यम है। जापान के ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ मॉडल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान और बाजार से जोड़कर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में रहे उपस्थित
इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, विभिन्न जनपदों के कारीगर, व्यवसायी, मीडिया कर्मी और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।



