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दिल्ली: कैराना उपचुनाव की तरह यहां पर भी काम नहीं आया ‘महागठबंधन’…

पिछले महीने हुए कैराना उपचुनाव की तरह जीडीए बोर्ड सदस्य के लिए हुए चुनाव में विपक्षी दलों का गठजोड़ नजर नहीं आया। कांग्रेस एकदम अलग चली। सपा और बसपा नामंकन पत्र भरने की प्रक्रिया तक अलग-थलग नजर आए। ऐन मौके पर नाम वापसी पर बदले समीकरण और पार्टी निर्देश के चलते बसपा ने नगर निगम में अपने से कम पार्षद बल होने के बावजूद सपा को समर्थन देते हुए अपनी पार्टी के पार्षद का नामांकन पत्र वापस करा लिया।

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सपा-बसपा के चार पदेन सदस्यों में से एक ही वोटिंग करने पहुंचे और तीन गैर हाजिर रहे। इसका फायदा भाजपा को मिला। अपने तीनों पार्षदों को जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया। कांग्रेस, सपा और बसपा की मजबूत दोस्ती के चलते कैराना उपचुनाव में तीनों के गठबंधन को फतह हासिल हुई थी।

माना जा रहा था कि जीडीए बोर्ड सदस्य के लिए नगर निगम में होने वाले चुनाव में तीनों दल एक होकर लड़ेंगे। निगम में कांग्रेस के 16, बसपा के 13 और सपा के पांच पार्षद हैं। इन्हें मिलाकर 43 वोट होते हैं। सपा के दो और बसपा के दो एमएलसी निगम में पदेन सदस्य होने के नाते वोटों की ताकत बढ़ कर 47 हो जाती है।

अगर, ये एक जुट होकर लड़े होते और वोटिंग मैनेजमेंट किया होता तो दो उम्मीदवारों को जीत दिलाकर जीडीए बोर्ड में गठबंधन की मजबूती का अहसास करा सकते थे। इनका औसत वोट प्रति उम्मीदवार 23.5 होता। जोकि, भाजपा के 22-22 वोट पाकर विजयी हुए दो पार्षदों से अधिक होता। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। अलग-थलग चलने के कारण कांग्रेस पार्षद मिथलेश हार गईं। सपा पार्षद आसिफ खान को ही जीत मिल सकती थी, लेकिन इनके चार में से तीन पदेन सदस्य गैर हाजिर रहे।

भाजपा ने झोंकी ताकत

जीडीए बोर्ड सदस्य के लिए चुनाव भले ही बेहद छोटा था, लेकिन भाजपा ने गंभीरता दिखाते हुए अपनी पूरी ताकत झोंकी। पांचों पदेन सदस्य केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एवं सांसद वीके सिंह, प्रदेश के रसद एवं खाद्य राज्यमंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग, राज्यसभा सदस्य अनिल अग्रवाल, साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, मुरादनगर विधायक अजीतपाल त्यागी इस चुनाव में वोटिंग करने पहुंचे। निर्दलीय सदस्यों को साथ लेने में भी भाजपा सफल रही।

भाजपा के पार्षद सचिन डागर 27, हिमांशु मित्तल 22 और कृष्णा त्यागी 22 वोट लेकर जीडीए बोर्ड सदस्य बनने में सफल रहे। तीनों विजयी पार्षदों को कुल 71 वोट मिले हैं। जबकि, भाजपा के पास अपने 57 पार्षदों और पांच पदेन सदस्यों समेत कुल 62 वोट ही थे। यानी नौ वोट निर्दलीय पार्षदों के वोट मिले।

राज बब्बर के कहने पर दिया जाकिर ने वोट

पांच दिन से भ्रष्टाचार के खिलाफ नगर निगम में भूख हड़ताल कर रहे कांग्रेस के वार्ड-95 के पार्षद जाकिर सैफी ने इस चुनाव में वोटिंग न करने का निर्णय लिया था। कांग्रेस के पार्षद सोमवार को उन्हें वोटिंग करने के लिए मनाते रहे, लेकिन वह नहीं मानें। वोटिंग का समय खत्म होने से पांच मिनट पहले पार्टी के एक पदाधिकारी ने राज बब्बर से उनकी बात कराई। राज बब्बर ने जब कहा तो जाकिर वोटिंग करने पहुंचे।

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