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लॉकडाउन में बिहार लौटे मजदूरों को जॉब कार्ड देगी नीतीश सरकार

लॉकडाउन में असंगठित क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूरों को लेकर बिहार सरकार लगातार मंथन कर रही है. वजह यह है कि बिहार में पहले से ही दिहाड़ी मजदूरों की संख्या काफी है. इसके बाद जैसे ही लॉकडाउन शुरू हुआ, बाहर के राज्यों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर बिहार वापस आ गए हैं. बताया जाता है कि दूसरे राज्यों से तकरीबन 15 लाख मजदूर बिहार में वापस लौटे हैं. अब इन मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है और आने वाले समय में यह समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है. ऐसे हालत में बिहार सरकार ग्रामीण विकास विभाग को यह जिम्मा सौंपा गया है कि बेरोजगार हुए मजदूरो को रोजगार मुहैया कराया जाए.

बिहार सरकार के ग्रमीण विकास विभाग ने निर्णय लिया है, जो भी दिहाड़ी मजदूर बाहर के राज्यों से बिहार पहुंचे हैं, उनका मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा के तहत होने वाले कामों के लिए प्रयोग में लाया जाएगा. वापस आए मजदूरों में जो चाहेंगे उनका मनरेगा जॉब कार्ड बने, उन्हें जॉब कार्ड बनाकर काम दिया जाएगा. हालांकि, जो पहले से मनरेगा के तहत मजदूर काम कर रहे हैं, उनको भी बिहार सरकार लगातार काम दे रही है. लॉकडाउन के बाद चाहे तो बिहार में रह कर मनरेगा में काम कर सकते है.

बिहार में मनरेगा मजदूरों को प्रतिदिन काम के लिए 194 रुपए मजदूरी मिलेगी. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा मजदूरों की पारिश्रमिक में बढ़ोतरी किए जाने के बाद बिहार में मजदूरी में 26 रुपए की बढ़ोतरी हुई है. पहले 168 रु प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, लेकिन 1 अप्रेल से 194 रु प्रतिदिन दिया जाएगा.ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि बिहार में शराबबन्दी है लेकिन पूर्व में शराब और ताड़ी बेचने वाले के लिए भी बिहार सरकार ने राशि दी है. इससे जुड़े लोगों को लॉक डाउन में दो दो हजार रुपये उनके खाता में डाला जा रहा है .

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