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नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने दिखाया प्रचंडतम रूप केपी ओली अब बड़े संकट में घिरे

एक तरफ जहां भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर विवाद चल रहा है, दूसरी ओर नेपाल के साथ भी इन दिनों जमीन को लेकर संकट जारी है. नेपाल ने जब से अपना नया नक्शा जारी किया है, दोनों देशों में विवाद गहराया है. इसका असर नेपाल की आंतरिक राजनीति पर भी हो रहा है और प्रधानमंत्री केपी ओली संकट में दिख रहे हैं.

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गुरुवार सुबह PM केपी ओली ने नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाई है. नेपाल की राजनीति में लगातार बदलाव हो रहा है. प्रधानमंत्री केपी ओली ने आज 11 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई थी, जिसे अब टाल कर आगे बढ़ाया गया था.

बीते कई दिनों से उनके इस्तीफे की मांग उठ रही थी, ऐसे में अब क्या होता है इसपर हर किसी की नजर है. केपी ओली के फैसले की अभी किसी भी मंत्री को जानकारी नहीं है.

भारत के साथ विवाद के बीच केपी ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग उठ रही है. इस बीच अब एक और मांग उठने लगी है कि उन्हें पीएम पद के साथ-साथ पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देना चाहिए.

केपी ओली अभी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हैं और प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ पार्टी के प्रमुख फैसले भी वही लेते हैं. लेकिन, बीते दिनों पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड की अगुवाई में जब से उनका विरोध शुरू हुआ है तभी से केपी ओली संकट में हैं.

बुधवार को भी नेपाली पीएम ने अपने करीबी मंत्रियों और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की थी, जिसमें आगे की रणनीति पर मंथन हुआ था.

भारत के साथ नक्शा विवाद होने के बाद से ही केपी ओली के खिलाफ पार्टी में आवाज उठ रही है. इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने उनके इस्तीफे की मांग कर दी.

दरअसल, नए कार्यकाल में नेपाल की दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने एक साथ आकर सरकार बनाई थी और कार्यकाल दर कार्यकाल पीएम पद पर बात बनी थी. लेकिन, अब जब हालात बिगड़ रहे हैं तो ओली का विरोध शुरू हो गया है.

केपी ओली ने उनकी गद्दी पर आए संकट के पीछे भारत का हाथ बताया था, हालांकि वह कुछ सबूत नहीं दे सके. बल्कि प्रचंड ने भी कहा कि भारत पर आरोप लगाने से पहले उन्हें सोचना चाहिए.

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