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अमेरिकी कंपनियों ने ट्रंप की इस नीति को अर्थव्यवस्था के लिए बताया गलत

अमेरिका की शीर्ष कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों को ‘असंगत’ बताते हुए कहा कि इससे अमेरिकी फर्मों का परिचालन प्रभावित होगा और साथ ही उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता पर भी भारी असर पड़ेगा. मुख्य कार्यकारियों ने पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा तथा अन्य नीतियों को असंगत बताया है.

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‘बिजनेस राउंडटेबल’ के सदस्यों ने अमेरिका की गृह मंत्री किर्स्टजन नीलसन को लिखे पत्र में कहा कि अमेरिकी आव्रजन नीति के असंगत होने की वजह से कानून का अनुपालन करने वाले कर्मचारियों में बेचैनी है. इस पत्र पर एपल के सीईओ टिम कुक, पेप्सिको की चेयरमैन एवं सीईओ इंद्रा नूयी, मास्टरकार्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ अजय बंगा, सिस्को सिस्टम्स के चेयरमैन एवं सीईओ चुक रॉबिंस के हस्ताक्षर हैं. बिजनेस राउंडटेबल अमेरिका की प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों का संघ है.

संघ ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका सरकार की अस्थिर कार्रवाई और अनिश्चितता की वजह से आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी और इससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी घटेगी. पत्र में विदेशी श्रमिकों के लिए एच-1बी वीजा आवेदनों के वर्तमान प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला गया है, इस श्रेणी को प्रौद्योगिकी उद्योग के समान देखा जाता है, लेकिन इसमें अन्य व्यवसाय आर्किटेक्ट्स, अर्थशास्त्री, चिकित्सक और शिक्षक भी शामिल हैं.

‘अमेरिकी नीति के लिए राष्ट्रीय फाउंडेशन’ द्वारा जुलाई में जारी एक संक्षिप्त विवरण से पता चलता है कि इस तरह के आवेदनों के खारिज होने की संख्या में वृद्धि हुई है. पिछले कुछ सालों से भारतीय आईटी कंपनियों को एच-1बी वीजा का सर्वाधिक लाभ मिल रहा था. पत्र में कहा गया है कि जब रिक्तियों की संख्या ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच रही है तब प्रतिभा को इस तरह प्रतबंधित नहीं किया जाना चाहिए.

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