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लोक निर्माण विभाग ने बजट व्यय में बनाया नया कीर्तिमान, विकास कार्यों को मिली नई गति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट व्यय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार विभाग ने स्वीकृत बजट के सापेक्ष अभूतपूर्व व्यय सुनिश्चित कर राज्य के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है।लोक निर्माण विभाग की यह उपलब्धि राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। विभाग द्वारा आगामी वर्षों में भी जनहित और आधारभूत संरचना विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को कुल लगभग 36,293.95 करोड़ रुपये (स्थापना सहित) का बजट प्राप्त हुआ, जिसके सापेक्ष 30,581.98 करोड़ रुपये का व्यय किया गया, जो कुल बजट का 84.26 प्रतिशत है। वहीं स्थापना व्यय को छोड़कर विभाग द्वारा 32,676.49 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 28,086.82 करोड़ रुपये का व्यय करते हुए 85.95 प्रतिशत की उच्च उपलब्धि दर्ज की गई।विशेष रूप से विभाग ने 28,000 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य को पार करते हुए 28,087 करोड़ रुपये का व्यय कर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि प्राप्त की है। यह उपलब्धि विभाग की कार्यकुशलता, प्रभावी वित्तीय प्रबंधन और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें 23,850 करोड़ रुपये के व्यय के मुकाबले इस वर्ष 28,086.82 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया है, जो विकास कार्यों में आई तेजी को दर्शाता है।यह भी उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में विभाग द्वारा निरंतर प्रगति करते हुए 31 मार्च 2026 तक व्यय को निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़ाया गया। विभाग द्वारा 23,000 करोड़ रुपये से लेकर 28,000 करोड़ रुपये तक के सभी प्रमुख लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया।इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रमुख सचिव अजय चौहान और प्रमुख अभियंता ए.के. द्विवेदी का कुशल नेतृत्व और रणनीतिक प्रबंधन अहम माना जा रहा है। पिछले दो महीनों से लगातार वीडियो संवाद के माध्यम से बजट व्यय की निगरानी के कारण कार्यों में तेजी आई और धनराशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित हुआ। इससे न केवल विकास कार्यों को गति मिली, बल्कि विभाग की कार्यशैली में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

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