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बिना जीएम की अनुमति के रेलवे बोर्ड तक नहीं होगी सीधी बात

प्रयागराज। रेलवे बोर्ड ने पत्राचार व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। अब बोर्ड को भेजे जाने वाले किसी भी प्रस्ताव, शिकायत या पत्र को तय प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा। सीधे रेलवे बोर्ड को पत्र भेजने की प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया गया है कि सभी मामले डिवीजन जोन रेलवे बोर्ड के क्रम से ही भेजे जाएंगे। 

नई व्यवस्था के तहत अब रेलवे बोर्ड को भेजे जाने वाले हर पत्र पर संबंधित जोन या यूनिट के जनरल मैनेजर (जीएम) या पीएचओडी की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। इतना ही नहीं, पत्र में इस स्वीकृति का स्पष्ट उल्लेख भी करना होगा।

रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि सामान्य रूटीन पत्र और रिमाइंडर को छोड़कर बाकी सभी पत्र अब सीएजी (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) या उससे ऊपर के अधिकारी ही साइन करेंगे। इससे नीचे के अधिकारियों की ओर से भेजे गए पत्रों को मान्य नहीं माना जाएगा। हालांकि, जनसंपर्क विभाग के मामलों में थोड़ी छूट दी गई है।

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