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प्रदेश में उन्नत तकनीक के साथ औद्यानिक क्रांति से शाहजहांपुर में समृद्ध होते किसान

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के किसानों की आय में वृद्धि करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की कृषि व्यवस्था में विविधता लाने और पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न औद्यानिक विकास योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मा0 मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य का उद्यान विभाग इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य यह है कि प्रदेश का किसान अपनी मेहनत और उन्नत कृषि विधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। औद्यानिक फसलों, जैसे फल, सब्जी, और फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने जैसे ठोस कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों का व्यापक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है और किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर नकदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन जिला प्रशासन के कुशल निर्देशन में अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (डप्क्भ्) जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं किसानों के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन ला रही हैं। जनपद शाहजहाँपुर में इस मिशन के अंतर्गत किए गए प्रयास एक मिसाल बनकर उभरे हैं। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप, प्रशासन ने किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रेरित किया और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
इसी क्रम में शाहजहाँपुर के ग्राम गंगसरा पुवायाँ के एक प्रगतिशील किसान श्री गोविन्द सिंह की सफलता की गाथा उल्लेखनीय है। पूर्व में पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के कारण उन्हें बढ़ती लागत और घटती आय जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। प्रदेश सरकार की औद्यानिक विकास की योजनाओं और एकीकृत बागवानी विकास मिशन की जानकारी मिलने के बाद, उन्होंने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में अपनी खेती की दिशा बदली। उन्होंने पारंपरिक फसलों के स्थान पर 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की बागवानी शुरू की। सरकार द्वारा प्रदान किए गए अनुदान और तकनीकी सहायता ने उनके इस निर्णय को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत अमरूद की उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का रोपण निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया। इस परियोजना में प्रति हेक्टेयर लगभग 1.50 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता ने किसान का मनोबल बढ़ाया। जब फसल तैयार हुई, तो विपणन की समस्या को दूर करने के लिए भी प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के तंत्र ने सहयोग किया। उद्यान विभाग और मण्डी समितियों के समन्वय से फसल को सीधे प्रक्षेत्र से ही व्यापारियों द्वारा क्रय कर लिया गया, जिससे किसान को बिचौलियों से मुक्ति मिली और उपज का उचित मूल्य प्राप्त हुआ। श्री गोविन्द सिंह को समस्त खर्चे निकालने के बाद लगभग 2.00 से 2.25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत आय में वृद्धि है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे सरकारी योजनाओं का सही उपयोग खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकता है।
इसी प्रकार, प्रदेश सरकार द्वारा संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस जैसी आधुनिक बुनियादी सुविधाओं के लिए भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है। शाहजहाँपुर के ही एक अन्य कृषक श्री अमरीक सिंह ने इस तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने प्रक्षेत्र पर पॉलीहाउस की स्थापना की। जिला प्रशासन के माध्यम से उन्हें न केवल वित्तीय सहायता मिली, बल्कि आधुनिक खेती के गुर भी सिखाए गए। पॉलीहाउस तकनीक के माध्यम से बेमौसमी सब्जियों और उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन संभव हुआ है, जिससे किसान को वर्ष भर निश्चित आय प्राप्त होती है। सरकार की इन नीतियों ने कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के साथ-साथ युवाओं को भी कृषि की ओर मोड़ा है।
आज क्षेत्र के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और नकदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे प्रदेश में एक नई आर्थिक क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध प्रदेश का विजन वास्तविक रूप में साकार होता दिख रहा है, जहाँ सही योजना, समर्पण और प्रशासनिक सहयोग से किसान अपनी तकदीर स्वयं लिख रहे हैं।

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