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मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में आयोजित प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि किसी भी समाज में दिशा देने व प्रेरणा प्रदान करने में प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रबुद्धजन समाज को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक तथा ओपिनियन मेकिंग का कार्य करते है। चिकित्सक मरीजों के प्रति, शिक्षक छात्रों के प्रति, अधिवक्ता वादकारियों के प्रति, उद्यमी उपभोक्ताओं के प्रति प्रेरणापुंज के रूप में सदैव नई दिशा प्रदान करते हैं। समाज के ऐसे ओपिनियन मेकर्स के साथ संवाद कार्यक्रम के माध्यम से जुड़ना एक अच्छी पहल है।
मुख्यमंत्री आज जनपद गोरखपुर में आयोजित प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पं0 दीनदयाल उपाध्याय और डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने प्रबुद्ध समाज को सदैव सम्मान दिया है। प्रत्येक भारतीय अपना गोत्र किसी न किसी ऋषि से जोड़ता है। इसके माध्यम से वह ज्ञान की विशिष्ट शाखा के साथ अपना सम्बन्ध जोड़ता है। ज्ञान की इसी परम्परा के साथ भारत का सम्बन्ध है। भारत का तात्पर्य है ज्ञान में रत। हम सभी उस ज्ञान परम्परा के वारिस हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश, काल और परिस्थिति को सही दिशा प्रदान करने की जिम्मेदारी हमारे प्रबुद्धजनों की है। दुनिया आज प्रगति के नये प्रतिमान स्थापित कर रही है। दुनिया में यह प्रगति विगत 400-500 वर्षां में हुई है। उस समय भारत को छोड़कर दुनिया के कथित विकसित देश अन्धकार में जी रहे थे। भारत दुनिया की उन प्राचीन सभ्यताओं व संस्कृतियां में है, जिसके पास हजारों वर्षां की विरासत व गौरवशाली अतीत है। भारत ने अपनी बौद्धिक सम्पदा से केवल अपने लिए नहीं, बल्कि विश्व बन्धुत्व की भावना तथा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ एवं ‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विराट भाव के साथ दुनिया का कल्याण किया। ‘यह मेरा है, यह तेरा है’ का भाव संकुचित लोगों का होता है। उदार चरित्र वाले भारत ने सम्पूर्ण विश्व को अपना परिवार माना। इस परिवार भाव के साथ हमने जीवन जिया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसकी प्रेरणा हम लोगों को दी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत ने किसी भी क्षेत्र पर जबरन आधिपत्य नहीं स्थापित किया। रामायण में भगवान श्रीराम जब लंका पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, तो वह लंका के राजा बन सकते थे। 14 वर्षां के वनवास के दौरान वह किसी राज्य में नहीं गये। विजय के उपरान्त जब भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण से पूछते हैं कि हमारा कार्य पूर्ण हो गया है, अब हम लोगों को वापस चलना चाहिए। लक्ष्मण जी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि लंका सोने की बनी है। अयोध्या में बर्तन ही सोने के बने हैं, जबकि लंका में सम्पूर्ण राजमहल सोने का बना है। कुछ दिन यहां रुकना चाहिए और युद्ध शिविर से निकलकर लंका का भ्रमण करना चाहिए। भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण जी से कहा कि ‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’। अर्थात हे लक्ष्मण, लंका भले ही सोने की बनी हो, लेकिन मुझे यह अच्छी नहीं लगती, क्योंकि अपनी माँ और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। भगवान श्रीराम का यह उद्बोधन आज भी हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा है। भगवान राम के यह शब्द एक ऋषि के माध्यम से हम सबके सामने आये।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश के प्रत्येक कोने में अपनी वेश-भूषा पहनकर जब हम जाते हैं, तो देखकर ही लोग ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष करते हैं। कोई जान पहचान न होने के बावजूद यह शब्द उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम सभी जगह सुनने को मिलता है। चाहे कोई व्यक्ति हिन्दी जानता हो या न जानता हो, अथवा तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तेलगू, बंगाली, उड़िया मूल का हो या नॉर्थ ईस्ट की किसी भी भाषा या बोली बोलता हो, उसे मुख से ‘जय श्रीराम’ का शब्द निकलता है। ‘जय श्रीराम’ का तात्पर्य भगवान श्रीराम के उन आदर्शां को मानना व उनका अनुसरण करना है, जो उन्होंने तत्कालीन समाज को एक प्रेरणा के रूप में दिए। ऋषिवाणी से वह अलग-अलग ग्रन्थों के माध्यम से हम सभी के समक्ष प्रस्तुत हुआ।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन या राष्ट्र व समाज का जीवन सदैव एक जैसा नहीं होता। यह धर्मचक्र है। उत्थान और पतन इसके जीवन का हिस्सा होता है। जब हम समृद्धि की पराकाष्ठा या उत्थान के सर्वाच्च शिखर पर हों, तो अहंकार नहीं होना चाहिए, लेकिन जब चुनौती या संकट आये, तो निराश भी नहीं होना चाहिए। सम्भाव के साथ सम व विषम परिस्थितियों में कार्य करने की सामर्थ्य प्रत्येक भारतीय को विकसित करना चाहिए, तभी देश आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम सभी ने बदलते हुए भारत को देखा है। विगत लगभग 12 वर्षां में बदलता हुआ भारत दुनिया के लिए प्रेरणा बना हुआ है। दुनिया में तेजी के साथ उभरती हुई भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के देशों के लिए प्रेरणा तथा विरोधियों के लिए एक चुनौती थी। दुनिया में आज हमारा सम्मान इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नेतृत्व में देश सही दिशा में आगे बढ़ा है। सकारात्मक दिशा के कारण भारत ने प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब हम अच्छी दिशा में कार्य करते हैं, तो परीक्षाएं भी देनी पड़ती हैं। कोरोना जैसी महामारी का सामना भारत सहित पूरी दुनिया को करना पड़ा, लेकिन 140 करोड़ की आबादी वाला भारत दुनिया में बेहतरीन कोविड प्रबन्धन में सफल रहा। अमेरिका में अच्छे स्वास्थ्य केन्द्र, प्रशिक्षित स्टाफ, वैक्सीन, दवा आदि होने के बावजूद लीडरशिप इस प्रकार की नहीं थी कि वह फ्रण्टफुट पर आकर कोरोना जैसी महामारी का मुकाबला कर सके। हमारे पास संसाधनों पर भार होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति को निःशुल्क वैक्सीन, टेस्ट, राशन सहित बेहतरीन कोविड प्रबन्धन के साथ फ्रण्टफुट पर आकर प्रधानमंत्री जी देश का नेतृत्व कर रहे थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है, जिससे तेल व ईंधन की आपूर्ति बाधित है। दुनिया के सभी देशों में तेल की कीमतें बढ़ी हैं। अमेरिका में डीजल, पेट्रोल व रसोई गैस की कीमतें बढ़कर चार गुना हो गयी हैं। यूरोपीय देशों की स्थिति खराब है। पाकिस्तान जैसे-तैसे टाइम काट रहा है। अरब के देश स्वयं परेशान हैं तथा अन्धकार में रहने को मजबूर हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में अव्यवस्था का वातावरण है। फरवरी में इस संकट की शुरुआत से लेकर अब तक जनता को अनावश्यक बोझ से बचाने के लिए पूरा प्रबन्ध किया है, लेकिन देश पर पड़ने वाले बोझ के दृष्टिगत प्रधानमंत्री जी ने आमजन से आह्वान भी किया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि विदेश से सोना न खरीदें, विदेशों में शादी-विवाह जैसे आयोजन न करें। विदेश में घूमने न जाए। यदि घूमना है तो अपने देश में किसी ईको-टूरिज्म, स्प्रिचुअल तथा हेरिटेज टूरिज्म की साइट पर जाएं। शादी-विवाह के आयोजन या भ्रमण इन स्थानों पर करे, इससे भारत का पैसा भारत में ही लगेगा तथा भारत में रोजगार का सृजन होगा। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि विदेश से सोना लाने के बजाय पूर्वजों का सोना बाहर निकलिये, उसकी मरम्मत कर आज की मांग के अनुसार री-डिजाइन, रिपेयर, सफाई आदि करा सकते हैं। हमारा दायित्व है कि प्रधानमंत्री जी के आह्वान तथा भगवान श्रीराम द्वारा लक्ष्मण जी को दिये गये उपदेश से प्रेरणा प्राप्त कर हम भी सोने के पीछे न भागें तथा अपने पूर्वजों की थाती को पुनर्जीवित करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने ईंधन बचाने के लिए जो आह्वान किया है, उस दिशा में पहले से प्रयास चल रहा है। पी0एम0 सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अन्तर्गत रूफटॉप सोलर पैनल घरों के ऊपर लगाये जा रहे हैं। जब हम कमरे में न हो तो पंखा, बिजली, कूलर व ए0सी0 आदि विद्युत उपकरण बन्द कर देना चाहिए। अगर एक ही मोहल्ले से कई बच्चे एक ही स्कूल में जा रहे हैं, तो कार पूलिंग की जा सकती है या एक ही ई-रिक्शा से सुरक्षित तरीके से बच्चों को भेजने की व्यवस्था की जा सकती है। अधिक बच्चों के लिए स्कूली बस की मांग की जा सकती है। इससे तेल की बचत होगी। इसमें हम अपना योगदान दे सकते हैं। हमारा दायित्व है कि आज की चुनौती के अनुरूप हम स्वयं को तैयार करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1965 में देश में गेहूँ के कम उत्पादन तथा अमेरिका द्वारा गेहूँ के निर्यात पर रोक लगाने के कारण, पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से एक समय व्रत रखने का आह्वान किया था। उस समय देशवासियों ने भी एक समय व्रत रखा था। प्रत्येक परिवार सप्ताह में एक दिन व्रत रखता था। यह व्रत रखने की परम्परा देश की आरोग्यता का कारण बनी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत आज खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। आज देश को गेहूँ, चावल, दाल, तेल, सब्जी, फल के लिए किसी पर निर्भर नहीं होना पड़ता है। हमें आने वाली चुनौतियों का सामना करना है। प्रधानमंत्री जी ने आह्वान किया है कि ईंधन की बचत करने में अपना योगदान दें। हमारा प्रयास होना चाहिए कि पी0एन0जी0 कनेक्शन के लिए आवेदन करें। हमें सप्ताह में एक दिन अपने कार्यालय, कार्यक्रम एवं बाजार जाने के लिए पब्लिक वाहन का प्रयोग करना चाहिए।
हमें इसके लिए अपनी तरफ से पहल करनी चाहिए। पहल करने पर हम भी कह सकते हैं कि जब देश के समक्ष चुनौती आयी थी, उस चुनौती का मुकाबला करने और अच्छा मॉडल देने की दिशा में हम भी आगे बढ़े थे। इस मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में सभी प्रबुद्धजन अपना प्रयास करें। यह चुनौती एल0पी0जी0, डीजल, पेट्रोल सहित किसी भी क्षेत्र में आ सकती है। चुनौती के समय अगर कोई राजनीति करता है, तो उसे खारिज भी करना चाहिए। समाज और मोहल्ले की तरफ से एक विज्ञप्ति जारी होनी चाहिए कि देश संकट में है, हम इस राजनीति की निन्दा करते हैं। इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की राजनीति स्वीकार नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम सभी ने बदलते हुए भारत, उत्तर प्रदेश व गोरखपुर को देखा है। वर्ष 2017 से पूर्व गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस का खतरा होता था। बच्चे के जन्म के उपरान्त माता-पिता बच्चे को बीमारी से बचाने के लिए चिंतित रहते थे। बच्चे के थोड़ा बड़ा होने पर उसकी पढ़ाई का संकट था। पढ़ाई के बाद उसके सामने रोजगार का संकट था। नौकरी व रोजगार के लिए बाहर जाने पर उसके समक्ष पहचान का संकट था। कई बार बाहर रहने के दौरान पुश्तैनी सम्पत्ति पर कब्जा हो जाता था। विकास, बिजली, सड़क व रोजगार का अभाव था। अन्नदाता किसानों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। व्यापारी से गुण्डा टैक्स वसूला जाता था। चिकित्सक भयाक्रांत रहते थे। बेटियां असुरक्षित थीं। दंगा, अराजकता, कर्फ्यू आदि उत्तर प्रदेश की पहचान बन गयी थी। आज प्रदेश में दंगा, अराजकता, कर्फ्यू व अव्यवस्था की स्थिति नहीं है। आज उत्तर प्रदेश में विकास का माहौल है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज हम कहीं भी जाएं, तो वहां या तो फोरलेन की कनेक्टिविटी मिलेगी, या फोरलेन मार्ग का निर्माण चल रहा होगा। गोरखपुर का फर्टिलाइजर कारखाना पहले बन्द था, आज वह चालू हो चुका है। गोरखपुर में एम्स और बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज बेहतरीन सेवाएँ दे रहे हैं। आज हर नौजवान को नौकरी और रोजगार की गारण्टी है। विगत 09 वर्षों में गोरखपुर जनपद में ही 15,000 करोड़ रुपये के विकास परियोजनाएँ संचालित हैं और लगभग इतनी ही राशि की विकास परियोजनाएँ प्रक्रियाधीन हैं। इन विकास परियोजनाओं से गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 50,000 नौजवानों को रोजगार एवं नौकरी प्राप्त हुई है। लोगों को स्वास्थ्य की अच्छी सुविधाएँ प्राप्त हो रही हैं। इंसेफेलाइटिस पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। आज बेटियाँ और व्यापारी सुरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री जी प्रबुद्धजनों से कहा कि विकास कार्यों के सम्बन्ध में चर्चा और परिचर्चा होनी चाहिए। 09 वर्ष पूर्व क्या था और आज क्या है वर्तमान पीढ़ी को इस सम्बन्ध में प्रबुद्धजनों को बताना चाहिए। वरना हमारी वर्तमान पीढ़ी भूल जाएगी कि जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, अराजकता क्या होती है। तुष्टिकरण की नीति का खामियाजा देश को भुगतना पड़ा है। क्षेत्रीय दल किस प्रकार शोषण तथा विश्वासघात कर रहे थे। अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की विजय से पूरा देश अभीभूत है। आज पश्चिम बंगाल में सुरक्षा का माहौल बना है। पूरे देश के नागरिक आज प्रसन्न है कि पश्चिम बंगाल के नागरिक भी सुरक्षित हैं, अब उनका कोई शोषण नहीं कर पाएगा। क्षेत्र के लिहाज से देश में अलग-अलग प्रदेश हो सकते हैं, लेकिन भाव और भंगिमा हम सभी की एक है। देश प्रथम है, देश से बड़ा कुछ नहीं है। राष्ट्र प्रथम के सिद्धान्त को ही अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। वर्तमान पीढ़ी को अतीत से अवगत कराना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 10 वर्ष पूर्व किस प्रकार की अव्यवस्था थी और किस प्रकार से बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता था। इन सभी को चर्चा और परिचर्चा का विषय बनाया जाएगा, तो वर्तमान पीढ़ी मानसिक रूप से तैयार रहेगी। वर्तमान पीढ़ी को ज्ञात रहेगा कि पूर्व में लोग कैसे पहचान के संकट के दौर से गुजरे थे। रोजगार को छीनने का कुत्सित प्रयास किया गया था। जिसने सबसे बड़े आबादी तथा सर्वाधिक पोटेंशियल वाले राज्य उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट पैदा करके बीमारू राज्य की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया था। उस अभिशाप को फिर से उत्तर प्रदेश में हावी नहीं होने देना है। जिस दिन उत्तर प्रदेश के सभी प्रबुद्धजनों का यह संकल्प हो जाएगा, उस दिन उत्तर प्रदेश के नौजवान को कोई गुमराह नहीं कर पाएगा। क्षणिक स्वार्थ के लिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनको समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से भटकाया जा रहा था। यह देश द्रोह है। हमें इस देश द्रोह की छूट किसी भी संगठन व संस्था को नहीं देनी चाहिए। यह समाज के प्रबुद्धजनों की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत विकास के पथ पर तीव्र गति से अग्रसर हुआ है। भारत की नई पहचान बनी है। दुनिया में सम्मान बढ़ा है। प्रबुद्धजनों द्वारा लोगों को बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री जी के पहले क्या था और उनके आने के बाद क्या परिवर्तन हुआ है। उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार आने के बाद राज्य कर्फ्यू मुक्त, माफिया मुक्त, गुण्डा मुक्त हुआ है। प्रदेश के अन्नदाता किसानों को सुविधा दी जाए, तो यहाँ का किसान देश और दुनिया का पेट भर सकता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का भव्य निर्माण हुआ है।

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