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दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019ः AAP-कांग्रेस गठबंधन के कयास से ही दोनों पार्टियों में आया भूचाल

गत लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दिल्ली की राजनीति में एक भी सीट हासिल नहीं करने वाली कांग्रेस को आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन की चर्चा से झटका लगा है। पार्टी में गुटबाजी की बात भी सामने आ रही है।

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सक्रियता बढ़ाकर दिल्ली में अपनी लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ाने में जुटी कांग्रेस के लिए आप से समझौते की चर्चा नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। AAP सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरकर कांग्रेस दिल्ली में काफी सक्रिय दिख रही थी, लेकिन यदि AAP नेताओं के आरोपों की बात करें तो पार्टी का एक गुट आगामी लोकसभा और फिर उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आप नेताओं से संपर्क साध रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के बार-बार AAP के साथ जाने से इन्कार के बावजूद यदि पार्टी में किसी स्तर पर AAP नेताओं से सीटों को लेकर बात हो रही है तो यह असामान्य भी नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष लामबंद है।

अजय माकन की सफाई के बीच यदि दोनों दलों में समझौता होता है तो इससे दिल्ली के लोगों के बीच कांग्रेस की छवि धूमिल होगी इस आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

दैनिक जागरण से बातचीत में अजय माकन ने ऐसी किसी भी संभावना से साफ इन्कार किया है और ऐसी चर्चाओं को केवल अफवाह करार दिया है, लेकिन पार्टी के कुछ नेता दबी जबान में ऐसी संभावना को अस्वीकार भी नहीं कर रहे हैं।

AAP-कांग्रेस गठबंधन हुआ तो…

करीब सात साल पहले अन्ना आंदोलन के समय अरविंद केजरीवाल सहित उनकी पूरी टीम कांग्रेस की बखिया उधेड़ने में जुटी थी। वर्ष 2012 में जब AAP का गठन केजरीवाल ने किया तो उस समय भी कांग्रेस ही उनके निशाने पर थी। इस दल ने कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचाया। 2012 तक पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में रही कांग्रेस 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में दिल्ली में आठ सीटों वाली पार्टी रह गई। कांग्रेस के समर्थन से AAP ने सरकार बनाई, जो 49 दिन तक चली। जब 2015 में फिर से चुनाव हुए तो कांग्रेस का सफाया हो गया। आप भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को प्रतिद्वंदी मानती है, लेकिन अब गठबंधन की चर्चा सामने आई।

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