मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनरुत्थान के कार्य को मिली बड़ी गति

नई दिल्ली: श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने सनातन संस्कृति के प्रमुख वाहक के रूप में कार्य किया। यही कारण है कि आज नई पीढ़ी के सामने भारतीय संस्कृति की महानता अक्षुण्ण है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज यहाँ अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समाधि मंदिर के कारण भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्थल का निर्माण हुआ है।
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरीजी महाराज के समाधि मंदिर में ‘श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह’ में मुख्यमंत्री श्री फडणवीस मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प.पू. जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरीजी, राम जन्मभूमि मंदिर न्यास के स्वामी गोविंददेव गिरीजी, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, स्वामी अखिलेश्वरानंदजी, स्वामी हरिचेतनानंदजी, स्वामी ललितानंद गिरीजी, महंत देवानंद सरस्वती, विनय रोहिला, प्रदीप बत्रा आदि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि भारतीय संस्कृति की संत परंपरा समाज को जोड़ने और उसे एकसूत्र में बांधने का कार्य करती है। वही कार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने ‘भारत माता मंदिर’ की स्थापना के माध्यम से शुरू किया। इसके अलावा, उन्होंने दुनिया भर में बिखरी हुई भारतीय सनातन संस्कृति की धाराओं को एक साथ लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। जहाँ कहीं भी आपदा या संकट आया, स्वामीजी वहाँ सहायता के लिए पहुँचे। उन्होंने सभी भेदभावों को दरकिनार कर राहत कार्य किया और इसके माध्यम से सनातन संस्कृति की पहचान बनाई। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार उच्च पदों का त्याग किया और अपने वैश्विक कार्य को आगे बढ़ाने में ही धन्यता मानी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी कारण उन्हें दुनिया भर में एक अद्भुत व्यक्तित्व के रूप में सम्मान मिला।
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि दुनिया की कई संस्कृतियाँ नष्ट हो गईं, लेकिन भारतीय सनातन संस्कृति आज भी जीवित है। उन्होंने कहा कि सनातन विचार भारतीय संस्कृति की विशेषता बताने वाले और सबसे प्राचीन विचार हैं। अब सरस्वती संस्कृति के उत्खनन (Excavation) से भी इन विचारों के अस्तित्व की पुष्टि हुई है। अतः विज्ञान और इतिहास, दोनों कसौटियों पर भारतीय जीवन शैली और सनातन संस्कृति समृद्ध सिद्ध हुई है। इस भारतीय संस्कृति ने विविधता को आत्मसात कर अपने वैभव को बढ़ाया है। इस संस्कृति को बचाने में स्वामी सत्यमित्रानंदजी जैसे वाहकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
स्वामीजी ने अपने आचरण और कार्यों से इस संस्कृति का पोषण किया और इसे भावी पीढ़ियों को सौंपा। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनरुत्थान के कार्य को बड़ी गति मिली है। इस कारण अब भावी पीढ़ियाँ भी स्वयं को इस सनातन संस्कृति से जोड़ने लगी हैं और उन्हें इस संस्कृति पर गर्व महसूस होने लगा है। मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने अंत में कहा कि इसके पीछे इन संत-महात्माओं के कार्यों का बहुमूल्य आधार है।



