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मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय कॉन्क्लेव ‘यू0पी0 टेक्सटाइल-2026’ का शुभारम्भ किया

  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल इण्डस्ट्री केवल आज की औद्योगिक गतिविधि नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की समृद्ध परम्परा, विरासत, हुनर और उद्यमिता का परिणाम है। प्रदेश के पास टेक्सटाइल क्षेत्र में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस, मानव संसाधन, देश का सबसे बड़ा बाजार, मजबूत एम0एस0एम0ई0 नेटवर्क और दुनिया का सबसे युवा वर्क फोर्स मौजूद है। यू0पी0 का मतलब ‘अप’ है और ‘अप’ यानी अनलिमिटेड पोटेंशियल। टेक्सटाइल क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की इसी असीम क्षमता को आधुनिक तकनीक, निवेश, नवाचार और ग्लोबल मार्केट के साथ जोड़ते हुए प्रदेश को विश्व के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित किया जाएगा।


मुख्यमंत्री जी आज यहाँ दो दिवसीय कॉन्क्लेव ‘यू0पी0 टेक्सटाइल-2026’ का शुभारम्भ करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने यू0पी0 टेक्स मित्र पोर्टल, हथकरघा-बुनकर समृद्धि योजना तथा उत्तर प्रदेश वस्त्र क्षेत्र प्रशिक्षण एवं कौशल विकास योजना का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री जी ने यू0पी0 टेक्सटाइल एवं गारमेण्टिंग पॉलिसी-2022 के अन्तर्गत उद्यमियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एल0ओ0सी0) तथा प्रोत्साहन राशि के प्रतीकात्मक चेक का वितरण किया। इसके पश्चात, उन्होंने अग्रणी वस्त्र एवं परिधान उद्यमियों के साथ राउण्ड टेबल संवाद किया।
मुख्यमंत्री जी ने सी0आई0टी0आई0 एवं एन0आई0टी0आर0ए0 की संयुक्त रिपोर्ट ‘भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग में ए0आई0, ऑटोमेशन एवं डिजिटलीकरण की तैयारी-एक सर्वेक्षण-आधारित आकलन’ का विमोचन तथा कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उनके समक्ष टेक्सटाइल पार्क एवं वस्त्रोद्योग के विभिन्न सेक्टर्स के लिए 09 एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि ‘ट्रांसफॉर्मिंग उत्तर प्रदेश इन्टू ए ग्लोबल टेक्सटाइल हब’ थीम पर आधारित यू0पी0 टेक्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर को नई दिशा और नई गति प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पॉलिसी के परिणामस्वरूप आज 5,196 करोड़ रुपये के नये निवेश प्रस्तावों के एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर हुए हैं। साथ ही, 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट तथा 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण भी किया गया। उत्तर प्रदेश जो कहता है, वह करके दिखाता है। एम0ओ0यू0, लेटर ऑफ कम्फर्ट और इन्सेण्टिव वितरण का आज का कार्यक्रम इसका प्रमाण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वाराणसी के रेशम और टेक्सटाइल की चर्चा वैदिक साहित्य में ‘हिरण्य वस्त्र’ अर्थात सोने के तारों से बुने हुए वस्त्र के रूप में मिलती है। रामायण में भगवान श्रीराम के विवाह उत्सव एवं अन्य राजसी प्रसंगों में काशी के उत्तम रेशमी एवं पीताम्बर वस्त्रों तथा चित्रकूट में वनवास के दौरान माता जानकी को प्राप्त दिव्य वस्त्रों का वर्णन भी धार्मिक साहित्य में मिलता है। महाभारत के राजसूय यज्ञ के प्रसंग में भी काशी के राजा द्वारा उपहार स्वरूप दिए गए रेशमी एवं शुद्ध सूती वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निर्मित वस्त्रों की माँग केवल देश तक सीमित नहीं थी, बल्कि प्राचीन काल में रोम और ग्रीक सभ्यताओं तक भारतीय वस्त्रों की माँग थी। इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल परम्परा में प्राचीनकाल से ही वैश्विक बाजार तक पहुँचने की क्षमता रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, कानपुर का टेक्सटाइल, लेदर एवं इण्डस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग ईको-सिस्टम, आगरा का अपैरल एवं एलाइड मैन्युफैक्चरिंग, सीतापुर का टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग तथा मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स और टेक्निकल टेक्सटाइल की सम्भावनाएँ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और टेक्सटाइल विरासत के अलग-अलग आयाम हैं।
प्रदेश में लगभग 02 लाख हैण्डलूम बुनकर और 05 लाख से अधिक पावरलूम बुनकर हैं, जो टेक्सटाइल सेक्टर की वास्तविक ताकत और इस पूरी कहानी के ‘रियल हीरो’ हैं। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है। देश के कुल फैब्रिक उत्पादन का लगभग 13 से 14 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में तैयार होता है। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में वस्त्र उद्योग प्रमुख है। इसलिए टेक्सटाइल सेक्टर को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन की रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है। पिछले 06 वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान एवं हस्तशिल्प निर्यात में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। प्रदेश के उत्पाद आज सैकड़ों अन्तरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व के टेक्सटाइल क्षेत्र में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा है। पिछले 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत को आधुनिक टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेण्ट, इनोवेशन और ग्लोबल मार्केट से जोड़कर नई इण्डस्ट्रियल स्टोरी लिखने का कार्य किया गया है। प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2030 तक 350 बिलियन यू0एस0 डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी तथा 100 बिलियन यू0एस0 डॉलर के टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य इस राष्ट्रीय संकल्प में पूरी शक्ति के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2025-26 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक के वस्त्र, परिधान एवं हस्तशिल्प निर्यात के साथ जनपद गौतमबुद्धनगर ने देश के प्रमुख निर्यातक जनपदों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सरकार का प्रयास है कि गौतमबुद्धनगर की सफलता के मॉडल को प्रदेश के अन्य जनपदों तक पहुँचाया जाए। प्रत्येक क्लस्टर के उत्पादन, डिजाइन, गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स और निर्यात को मजबूत तरीके से जोड़ने की आवश्यकता है। इसी दिशा में ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओ0डी0ओ0पी0) योजना के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दी गई है।
टेक्सटाइल क्षेत्र में 35 से अधिक जनपदों के वस्त्र एवं हैण्डलूम से जुड़े उत्पादों को ओ0डी0ओ0पी0 योजना के माध्यम से नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जी0आई0 टैग प्राप्त हो चुका है। जी0आई0 टैग किसी उत्पाद की गुणवत्ता, उसके उत्पादन क्षेत्र, परम्परा और उससे जुड़े कारीगरों की सामूहिक पहचान का सम्मान है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की लाखों महिलाएँ भी टेक्सटाइल एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
अब प्रदेश को ‘फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेण्ट, गारमेण्ट से ब्राण्ड और ब्राण्ड से ग्लोबल मार्केट’ तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के लिए स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने निवेशकों और उद्यमियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश इस पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने और स्वयं को इसका वैश्विक केन्द्र बनाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी नहीं थी। प्रदेश में माफिया की समानान्तर व्यवस्था संचालित होती थी और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ की पहचान बन गई थी। हत्या, फिरौती, कब्जा, गुण्डा टैक्स और अपहरण जैसी गतिविधियाँ फल-फूल रही थीं। उस समय बेटी, व्यापारी और निवेशक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। प्रदेश में त्योहारों से पहले उपद्रव और दंगों की आशंका बनी रहती थी। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सहित विभिन्न स्थानों पर बड़े दंगे हुए तथा लम्बे समय तक कर्फ्यू की स्थिति बनी रही थी। ऐसी परिस्थितियों में बाजार, व्यापार और अर्थव्यवस्था का आगे बढ़ना सम्भव नहीं था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। अपराध, अपराधी और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी गई है। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। इससे आमजन, व्यापारी और निवेशकों का विश्वास बहाल हुआ है। किसान का बाजार पर, व्यापारी और निवेशक का कानून पर तथा युवा का अपने भविष्य और प्रदेश की क्षमता पर विश्वास मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश की जी0एस0डी0पी0 तथा प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त हुई है। वीमेन वर्क फोर्स की भागीदारी को भी तीन गुना बढ़ाने में सफलता मिली है। एक्सप्रेस-वे से एयरपोर्ट, रेलवे से वॉटर-वे तथा फ्रेट कॉरिडोर से इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक कॉरिडोर तक उत्तर प्रदेश में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप 36 सेक्टोरल पॉलिसीज तैयार की हैं। प्रदेश में निवेशकों के लिए 75,000 एकड़ का लैण्ड बैंक उपलब्ध है। नीतियों में किए गए प्राविधानों के अनुरूप निवेशकों को सुविधाएँ उपलब्ध कराने तथा ऑनलाइन इन्सेण्टिव वितरण की व्यवस्था की गई है। प्रदेश लगातार पिछले 06 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में आगे बढ़ रहा है। निवेशकों से किए गए वायदों को शत-प्रतिशत लागू कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। इन निवेशों के माध्यम से प्रदेश में 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की ग्राउण्ड ब्रेकिंग शीघ्र की जाएगी। प्रदेश में बड़े कारखानों की संख्या भी 14,000 से बढ़कर 35,000 हो गई है। एम0एस0एम0ई0 सेक्टर पहले कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। उसे ओ0डी0ओ0पी0 के माध्यम से ब्राण्डिंग और बाजार उपलब्ध कराया गया। प्रत्येक एम0एस0एम0ई0 यूनिट को राज्य सरकार की ओर से 05 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा गारण्टी भी दी गई है। आज 96 लाख एम0एस0एम0ई0 यूनिट्स के साथ उत्तर प्रदेश, देश में सर्वाधिक एम0एस0एम0ई0 वाला राज्य है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की लगभग 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेण्ट की लगभग 60 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग उत्तर प्रदेश में हो रही है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के 06 रणनीतिक नोड्स के लिए 35,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में 12 प्लेज पार्क तैयार किए जा रहे हैं। सिंगल विण्डो क्लीयरेंस के साथ निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाएँ निवेशकों को सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि दुनिया में टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से बदल रहा है। टेक्सटाइल इण्डस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं रही है। साइंस और टेक्नोलॉजी के संगम ने इसे टेक्निकल टेक्सटाइल के रूप में एक नए और तेजी से बढ़ते हुए क्षेत्र में परिवर्तित किया है। डिफेंस, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और स्पोर्ट्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह नई तकनीक, नई जरूरतों और नई अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर तेजी के साथ टेक्निकल टेक्सटाइल की दिशा में आगे बढ़ाना होगा। प्रदेश के पास मैन्युफैक्चरिंग बेस, मजबूत एम0एस0एम0ई0 नेटवर्क, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग ईको-सिस्टम, स्पोर्ट्स गुड्स की पहचान तथा दुनिया का बड़ा घरेलू बाजार मौजूद है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशक को अलग-अलग इन्फ्रास्ट्रक्चर तलाशने की आवश्यकता न पड़े। इण्टीग्रेटेड टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में एक ही ईको-सिस्टम में पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन उपलब्ध हो। पी0एम0 मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी महत्वपूर्ण पहलें इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के अन्तर्गत जनपद वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में परियोजना के लिए भूमि चिन्हित कर आरक्षित की गई है। वहीं सीतापुर, मऊ, कानपुर, झाँसी और रायबरेली जनपदों में भी टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क की स्थापना के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की कार्यवाही प्रारम्भ की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जब इन्फ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी एक साथ चलते हैं, तो इन्वेस्टमेण्ट, इण्डस्ट्री और रोजगार के अवसरों को आने से कोई रोक नहीं सकता।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक जिले की टेक्सटाइल स्ट्रेंथ को रोजगार की स्ट्रेंथ में बदलना है। जहाँ बुनाई की परम्परा है, वहाँ आधुनिक वीविंग और डिजाइन की सुविधाएँ विकसित हों। जहाँ गारमेण्ट मैन्युफैक्चरिंग की सम्भावना है, वहाँ गारमेण्ट क्लस्टर विकसित किए जाएं। जहाँ हैण्डीक्राफ्ट है, वहाँ डिजाइन, ब्राण्डिंग और एक्सपोर्ट सपोर्ट पहुँचे। जहाँ स्किल है, वहाँ उद्यमिता का द्वार खुले। प्रदेश के एम0एस0एम0ई0 केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर न रहें, बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। प्रदेश के युवा केवल जॉब सीकर न रहें, बल्कि टेक्सटाइल इण्टरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें। आर्टिजन केवल सप्लायर न रहें, बल्कि ब्राण्ड ऑनर बनें। ‘डिजाइन्ड इन यू0पी0, मेड इन यू0पी0 एण्ड एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि निफ्ट, रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, कानपुर जैसे संस्थान प्रदेश के युवाओं को टेक्सटाइल की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। ओ0डी0ओ0पी0 ने यह साबित किया है कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देकर उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। वाराणसी की साड़ी, भदोही की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी और बरेली की जरी में केवल क्राफ्ट्समैनशिप नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पूँजी भी निहित है। प्रदेश की इस कल्चरल कैपिटल को इकोनॉमिक कैपिटल में बदलने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों, निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स से अपील की कि दो दिवसीय यू0पी0 टेक्स कॉन्क्लेव के दौरान वे अपने महत्वपूर्ण सुझाव दें। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त होंगे, उन्हें आवश्यकतानुसार प्रदेश की टेक्सटाइल पॉलिसी का हिस्सा बनाते हुए लागू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप टेक्सटाइल क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेण्ट और मार्केट सहित प्रत्येक स्तर पर तैयार है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश नई सम्भावनाओं को स्वीकार करने की मानसिकता के साथ भी तैयार है। राज्य सरकार की मंशा है कि प्रदेश में बुनकर का हुनर आगे बढ़े, उद्यमी का कारोबार बढ़े, युवा का रोजगार बढ़े और महिलाओं की भागीदारी बढ़े। निवेश और निर्यात बढ़े तथा उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल विरासत को वैश्विक पहचान मिले।
खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री राकेश सचान ने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में भारत टेक्स जैसे बड़े आयोजन के माध्यम से देश के वस्त्र उद्योग को वैश्विक मंच मिला है, उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में पहली बार यू0पी0 टेक्स का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश के हथकरघा, वस्त्र, परिधान, तकनीकी वस्त्र एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को एक मंच पर लाकर निवेश और रोजगार की नई सम्भावनाएँ तैयार करना है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। एक्सप्रेस-वे, सड़कों, रेलमार्ग, हवाई अड्डों, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और बेहतर कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए देश के सबसे आकर्षक राज्यों में शामिल किया है।
कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों एवं निवेशकों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
इस अवसर पर सलाहकार मुख्यमंत्री श्री अवनीश कुमार अवस्थी, यू0पी0 ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सी0ई0ओ0 श्री मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री अनिल कुमार सागर, आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री के0 विजयेन्द्र पाण्डियन सहित उद्यमी, निवेशक, बुनकर, हथकरघा संचालक तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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