मुख्यमंत्री ने जनपद प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को सम्बोधित किया


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए प्रतिवर्ष कैशलेस चिकित्सा बीमा योजना की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बार काउन्सिल और बार एसोसिएशन के माध्यम से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर इस योजना को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें शासन से जुड़े मामलों और न्यायालय में लम्बित प्रकरणों की जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से मिल सके। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से लम्बे समय से अधिवक्ताओं के चैम्बरों में बुनियादी सुविधाओं के लिए फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जा रहा था। न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से जो भी प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष आएगा, सरकार उसमें पूरा सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ऑफिस चेम्बर और अधिवक्ता भवन की चाभी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को सौंपी। उन्होंने आस्था, न्याय और ज्ञान की पावन भूमि प्रयागराज को नमन करते हुए प्रदेशवासियों को हिन्दी दिवस, हरितालिका तीज एवं गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि गणपति को भारतीय आध्यात्मिक परम्परा में बुद्धि, विवेक और न्याय के देवता के रूप में प्रथम पूज्य माना गया है। हरितालिका तीज अखण्ड सौभाग्य की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। आज पूरा देश हिन्दी को राजभाषा के रूप में सम्मान दिलाने के संकल्प से जुड़ा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने और उसके विश्वास का प्रतिनिधित्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश के स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। न्यायपालिका और बार के बीच बेहतर संवाद, समन्वय, सहयोग एवं पारस्परिक सम्मान न्याय प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज की धरती ने देश की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को सदैव महत्वपूर्ण दिशा दी है। पं0 मोतीलाल नेहरू, महामना पं0 मदन मोहन मालवीय सहित अनेक अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। सरदार वल्लभभाई पटेल और बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर जैसे विधिवेत्ताओं ने भी देश की स्वतंत्रता और संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रयागराज की धरती का सम्बन्ध भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद की स्मृतियों से भी गहराई से जुड़ा है। डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद कुम्भ और माघ मेले के दौरान प्रयागराज में प्रवास और कल्पवास करते थे। यह केवल उनकी व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि भारतीय विरासत और जन-आस्था के प्रति उनके गहरे सम्मान का प्रतीक भी थी। राष्ट्रपति बनने के बाद वर्ष 1951 में सोमनाथ मन्दिर के पुनरुद्धार एवं प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में स्वयं उपस्थित होकर उन्होंने स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और गौरवशाली विरासत को सम्मान प्रदान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के राष्ट्र एवं संविधान निर्माण में योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्रयागराज में डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया। यह विश्वविद्यालय प्रारम्भ हो चुका है और इसका भव्य परिसर निर्माणाधीन है, जो शीघ्र तैयार होगा।
भारत में लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तम्भों की अपनी-अपनी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन इनके बीच बेहतर समन्वय से ही लोकतंत्र अधिक परिपक्व और मजबूत बनता है। विधि का शासन और सुशासन स्थापित करने में न्यायपालिका की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। न्याय का रथ बार और बेंच रूपी दो महत्वपूर्ण पहियों पर चलता है। इसलिए दोनों के बीच निरन्तर बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग बना रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनकी आवश्यकताओं पर भी गम्भीरता से विचार किया जाता है। अधिवक्ताओं को न्याय व्यवस्था से अलग करके नहीं देखा जा सकता। न्याय प्रशासन की मजबूती के लिए बार और बेंच के बीच सम्मान, शिष्टाचार, संवाद और सहयोग आवश्यक है।
वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश के समक्ष केवल संसाधनों की कमी ही नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक बुनियादी ढांचे की भी गम्भीर चुनौती थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस बल में लगभग 45 से 50 प्रतिशत पद रिक्त थे। उस समय पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की क्षमता भी मात्र 3,000 पुलिसकर्मी प्रतिवर्ष थी। राज्य सरकार ने प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर अब 60 हजार पुलिसकर्मियों को प्रतिवर्ष आधुनिक प्रशिक्षण देने योग्य बनाया है।
आज प्रदेश के 56 जनपदों में पुलिस से सम्बन्धित बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर मजबूत किया गया है। पुलिस बैरक, प्रशिक्षण संस्थान और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया गया है। वर्ष 2017 के लखनऊ में पुलिस बैरक के औचक निरीक्षण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय बैरकों की स्थिति अत्यन्त खराब थी। जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने की अपेक्षा की जाती है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ न्यायपालिका के लिए भी आधुनिक और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने कार्य किया है। अधीनस्थ न्यायालयों की स्थिति पहले अत्यन्त जर्जर थी। अनेक न्यायालय अस्थायी अथवा किराए के भवनों में संचालित हो रहे थे। कई स्थानों पर अधिवक्ताओं के चैम्बरों की स्थिति भी अत्यन्त खराब थी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गवाहों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी गवाह संरक्षण व्यवस्था विकसित की गई है। पहले भय के कारण गवाहों के मुकर जाने से गम्भीर आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि चुनौती बन जाती थी। इसी प्रकार कैदियों को न्यायालय तक लाने-ले जाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों के कारण फरार होने अथवा रास्ते में हमले जैसी घटनाओं की शिकायतें आती थीं। सरकार ने इन व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किया है।
कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से सुधार और परिवर्तन के परिणाम आज स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका सुशासन की आधारशिला को मजबूत करती है और सुशासन किसी भी निर्वाचित सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। न्यायिक व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। जिला न्यायालयों और जेलों को उच्च गति इण्टरनेट तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा से जोड़ा गया है।
न्यायसूची प्रणाली लागू कर न्यायालयों में गवाही को वर्चुअल माध्यम से दर्ज कराने की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे मुकदमों की सुनवाई में लगने वाला समय कम होगा। न्यायालयी दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटलीकरण कर उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है। पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय से दोषसिद्धि दर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन मंच से जोड़कर समय पर आरोपपत्र दाखिल करने तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
जिन 10 जनपदों में जिला न्यायालय किराए के भवनों में संचालित हो रहे थे, वहां अब एकीकृत न्यायालय परिसरों के निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अरुण भंसाली के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इन एकीकृत न्यायालय परिसरों में एक ही परिसर और एक ही छत के नीचे विभिन्न न्यायिक कार्यों की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन परिसरों में न्यायिक अधिकारियों के लिए सुविधाओं के साथ अधिवक्ताओं के चैम्बर, खेल सुविधाएं, स्टेडियम, इण्डोर स्टेडियम तथा अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैण्टीन जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जा रही हैं। मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों की स्थापना की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। प्रथम चरण में जनपद स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन की मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज यहां लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अधिवक्ता चैम्बर परिसर की चाभी सौंपी गई है। इसमें 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर, बहुस्तरीय पार्किंग, भोजन कक्ष, सामुदायिक कक्ष और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह अधिवक्ता समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अधिवक्ता कल्याण निधि में पहले दी जाने वाली 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर 05 लाख रुपये किया गया है। अधिवक्ता के निधन पर उनके परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है।
प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अधिवक्ता चैम्बरों के निर्माण के लिए भी राज्य सरकार धनराशि उपलब्ध करा रही है। कौशाम्बी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती सहित लगभग एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चैम्बरों के निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में राज्य के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने वाले राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तीन नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023, भारतीय न्याय संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 लागू किए गए हैं। इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रारम्भ में प्रशिक्षण की चुनौती थी, लेकिन अधिवक्ता समाज ने जिस तेजी और तत्परता से इन्हें समझकर लागू करने में सहयोग दिया, वह अभिनन्दनीय है।
आज साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा निजता, डिजिटल कॉमर्स, वित्तीय प्रौद्योगिकी, बौद्धिक सम्पदा और जलवायु सम्बन्धी मुकदमों जैसे नए क्षेत्र तेजी से सामने आ रहे हैं। इसलिए अधिवक्ताओं को तकनीक, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे परिवर्तनों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। भविष्य के लिए तैयार अधिवक्ता ही भविष्य की न्याय व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है। युवा अधिवक्ता केवल सफल विधि व्यवसायी बनने तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक भी बनें। न्यायालय केवल मुकदमे के परिणाम तक अधिवक्ता की भूमिका को सीमित नहीं करता, बल्कि संवैधानिक न्याय और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी को भी बढ़ाता है। कई बार अधिवक्ता के प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और उसके जीवन की दिशा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अरुण भंसाली ने कहा कि मुख्यमंत्री जी की कार्यक्रम में उपस्थिति न्यायपालिका, सरकार और अधिवक्ता समुदाय के बीच निरन्तर संवाद, पारस्परिक सम्मान और संस्थागत सहयोग का प्रतीक है। बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण अंग हैं और दोनों के सहयोग से ही नागरिकों का कानून के शासन में विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए नवनिर्मित कक्षों एवं पार्किंग सहित बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के लिए प्रदेश सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्याय तक सुगम पहुंच, आधुनिक न्यायिक अवसंरचना और एकीकृत न्यायालय परिसरों के विकास में सरकार का सहयोग स्वागत योग्य है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। प्रदेश में अपराध और अपराधियों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेन्स नीति ने आम नागरिक के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव मजबूत किया है। न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, अधिवक्ताओं के सम्मान एवं सुविधाओं के विस्तार तथा आधुनिक न्यायिक अवसंरचना के विकास के लिए प्रदेश सरकार निरन्तर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सुशासन, सुरक्षा और विकास के नए मानदण्ड स्थापित कर रहा है।
कार्यक्रम को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री अरिन्दम सिन्हा तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डे ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री श्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, न्यायमूर्तिगण, महाधिवक्ता श्री अजय कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्तागण, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारीगण, अधिवक्तागण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



