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मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के चैरिटेबल ब्लड सेण्टर का लोकार्पण किया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि किसी संगठन या संस्था की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि उसने अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए किस प्रकार का योगदान दिया है। पेशेवर कार्य से हटकर ब्लड बैंक एवं निःशुल्क ओ0पी0डी0 का संचालन किया जाना इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन (आई0एम0ए0) की उपलब्धि है। आई0एम0ए0 केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की अखिल भारतीय संस्था ही नहीं है, बल्कि यह अपने चिकित्सकीय पेशे के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी निर्वहन कर रही है। आई0एम0ए0 ने गोरखपुर में निःशुल्क ओ0पी0डी0 तथा ब्लड बैंक की शुरुआत करके यह सिद्ध किया है कि जहां चाह है, वहीं राह है।
मुख्यमंत्री जी आज गोरखपुर में इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन (आई0एम0ए0) चैरिटेबल ब्लड सेण्टर का लोकार्पण करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017-18 में गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल ने आई0एम0ए0 की गोरखपुर शाखा के माध्यम से निःशुल्क ओ0पी0डी0 का शुभारम्भ किया था। उस समय आई0एम0ए0 ने अपने ऑफिस के लिए जमीन की मांग की थी। आज आई0एम0ए0 ने इसी जमीन पर एक बेहतरीन एवं विस्तृत ब्लड बैंक स्थापित किया है। यह चैरिटी के माध्यम से किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुरूप रक्त की आपूर्ति करेगा।
आज दुनिया बदल रही है। हम अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा आधुनिक तकनीक उपलब्ध करा सकते हैं, रक्त नहीं बना सकते। चिकित्सक संवेदना के आधार पर रक्तदाताओं को रक्तदान के लिए तैयार कर, उनके रक्त के माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को जीवनदान प्रदान करने का कार्य करते हैं। ब्लड बैंक चैरिटी के माध्यम से संचालित हो सकता है। ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेटर यूनिट स्थापित की जा सकती है और डेंगू जैसी बीमारियों के लिए प्लेटलेट्स की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है।
मांग के अनुरूप रक्त की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। चिकित्सक इस कार्य के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा ले सकते हैं। रक्तदान के लिए समय-समय पर अपील भी जारी की जानी चाहिए। जो पेशेवर रक्तदाता अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं, यदि उन पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में भीषण संक्रमण के संकट से गुजरना पड़ सकता है। इस प्रकार के रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश लगाना होगा। इस विषय को शासन व प्रशासन के संज्ञान में लाते हुए प्रत्येक चिकित्सक को जागरूकता के अभियान से जुड़ना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें आई0एम0ए0 द्वारा वाराणसी और बरेली में संचालित ब्लड बैंक का भी अवलोकन करने का अवसर प्राप्त हुआ था। प्रयागराज में भी इस प्रकार के ब्लड बैंक का उद्घाटन किया गया है। गोरखपुर में आई0एम0ए0 को ऑफिस बनाने के लिए जीडीए द्वारा यह भूखण्ड उपलब्ध कराया गया था। आई0एम0ए0 ने इसका उपयोग करते हुए यहां एक चैरिटेबल ब्लड बैंक की स्थापना की है। यह कार्य आई0एम0ए0 की चिकित्सकीय संवेदनशीलता का प्रमाण है। जब आप अच्छे कर्म करते हैं तो ईश्वर भी आपका सहयोग करते हैं। ब्लड बैंक के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला आई0सी0यू0 गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय ने प्रारम्भ किया है। वहां वर्ष 2006-07 में डायलिसिस की चार यूनिट प्रारम्भ हुई थीं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर में आई0एम0ए0 के सदस्यों की संख्या 1,400 से अधिक है। ये सभी सदस्य आज गोरखपुर की जनता की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। एक नए भारत, नए उत्तर प्रदेश और नए गोरखपुर का दर्शन हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है। आज से 7-8 वर्ष पहले इस रीजन में प्रत्येक माता-पिता को यह डर लगता था कि मस्तिष्क ज्वर (इन्सेफलाइटिस) पता नहीं किस बच्चे को निगल ले। सभी लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरसते थे। कहीं संसाधनों का अभाव था, तो कहीं बेड की कमी का सामना करना पड़ता था। उस समय बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सुविधा का एकमात्र केन्द्र था। यहां एक ही बेड पर चार-चार मरीजों को रखा जाता था और सुविधाओं का अभाव था।
आज गोरखपुर का बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के साथ इन्सेफेलाइटिस के उपचार के लिए कार्य कर रहा है। आज से 09 वर्ष पूर्व बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज स्वयं बीमार था। आज वह स्वास्थ्य के एक बेहतरीन केन्द्र के रूप में अपने आपको तैयार कर चुका है।
वर्तमान में गोरखपुर में एम्स, दो मेडिकल कॉलेज और चार विश्वविद्यालय संचालित हैं। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोण्डा, अयोध्या तथा अम्बेडकर नगर में मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ हो गए हैं। आज स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरीन बदलाव आया है। विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं इन मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पहले गोरखपुर में माफिया आपके सामने पहचान का संकट खड़ा करता था। आज माफियाओं से मुक्ति मिली है। अब उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता मिली है। आज प्रदेश में 85 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। दो एम्स भी सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। यह नए उत्तर प्रदेश की पहचान है। पहल करने से सब कुछ सम्भव हो सकता है। प्रदेश के बाहर अब लोगों को पहचान का संकट नहीं होता। आज प्रदेश में प्रत्येक चिकित्सक, व्यापारी तथा नागरिक सुरक्षित महसूस कर रहा है।
आज गोरखपुर में अनेक हॉस्पिटल डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। पहले मरीजों को डायलिसिस के लिए लखनऊ व वाराणसी जैसे शहरों में जाना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिला अस्पताल में 10-10 बेड पर निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने का कार्य प्रारम्भ कर दिया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में एम0बी0बी0एस0 की सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं। पी0जी0 की सीटें भी दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ी है। यह सभी संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने कानपुर में आई0आई0टी0 कानपुर के साथ मिलकर मेडिटेक का एक सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का कार्य प्रारम्भ किया है। प्रदेश सरकार इस कार्य ने सहयोग कर रही है। एस0जी0पी0जी0आई0 में भी सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस का विकास किया जा रहा है।
कार्यक्रम को गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव एवं विधायक श्री विपिन सिंह ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, विधायक श्री प्रदीप शुक्ला व डॉ0 विमलेश पासवान, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारू चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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