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ममता सरकार और राज्यपाल फिर आमने-सामने, योग दिवस मनाने को लेकर राजभवन की चिट्ठी पर रार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार और राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी फिर आमने-सामने हैं. इस बार 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर ठनी है. दरअसल, राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के सभी विश्वविद्यालयों को योग दिवस मनाने के लिए चिट्ठी लिखी है. ममता बनर्जी सरकार ने राज्यपाल पर निशाना साधा है कि उन्होंने ऐसा करते हुए इकतरफा फैसला किया और राज्य सरकार की अनदेखी की.

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राजभवन के मुताबिक राज्यपाल त्रिपाठी ने सरकार की ओर से संचालित सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को 12 जून को चिट्ठी भेजकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए पर्याप्त तैयारियां करने के लिए कहा. पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्था चटर्जी ने राज्यपाल के फैसले की आलोचना की. चटर्जी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर रहे हैं और सरकार की ओर से संचालित  विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के नाते अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं.  

चटर्जी  ने कहा, “राज्य प्रशासन को दरकिनार कर इस तरह की चिट्ठियां जारी करने से वो इन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं. वे राज्य सरकार को अंधेरे में रख कर राज्य के विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी कर रहे हैं. अब ये लोगों को तय करना चाहिए कि उनके क्रियाकलाप कितने सांविधानिक और नैतिक हैं.”

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से पहले ही देशभर के विश्वविद्यालयों को योग दिवस मनाने के लिए सर्कुलर भेजा जा चुका है. ये भी कहा गया है कि संबंधित कार्यक्रम की रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए. आयोग के सचिव रजनीश जैन की ओर से 13 जून को लिखी गई चिट्ठी  (No.F.14-13/2015(CPP-II) में देश के सभी विश्वविद्यालयों को संबोधित किया गया. चिट्ठी में लिखा गया है, ‘आयुष मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव को मनाने के लिए तैयारियां कर रहा है. इस साल के उत्सव में युवाओं की अधिक से अधिक और सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है. ये फैसला किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2018 को उपयुक्त ढंग से मनाया जाए.’

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