उत्तर प्रदेश

जेल में गो-माता की सेवा कर पाप धुलेंगे कैदी, रखे जाएंगे छुट्टा मवेशी

मान्यता है कि अच्छे कर्म करने पर ईश्वर पुराने पापों को माफ कर देता है। कौशांबी जिला जेल में कैदियों के लिए ऐसा ही इंतजाम किए जाने की तैयारी है। वह गो-माता की सेवा कर अपने पाप धो सकेंगे। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा से अनुमति मिलने के बाद जेल अधीक्षक ने जमीन चिह्नित कर गोशाला निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। हरी झंडी मिलते ही योजना परवान चढ़ जाएगी।जिले में नहीं है कांजी हाउस  गंगा-यमुना के बीच आबाद इस जिले में एक भी कांजी हाउस नहीं है। तस्करों से बरामद मवेशियों को पुलिस वाले गांव के किसानों को सौंप देते हैं, लेकिन किसान इन्हें छुट्टा छोड़ देते हैं। यह छुïट्टा मवेशी फसलों के लिए मुसीबत और किसानों के लिए सिरदर्द बन जाते हैं।

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कौशांबी की जिला जेल में बंदियों और कैदियों के सुधार की दिशा में कई प्रयास हाल के दिनों में किए गए हैं।

सेहत के लिए योग तो साक्षरता के लिए पाठशाला और रोजगार से जोडऩे के लिए तकनीकी प्रशिक्षण। अब बंदियों को गोवंश की सेवा का भी अवसर मिल सकेगा। बीते महीने शासन की ओर से जिला जेल में गोवंश पालन के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। जेल अधीक्षक ने जिलाधिकारी की अनुमति से विस्तृत प्रस्ताव भेज दिया है। इतना ही नहीं कारागार में 150 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा गोशाला बनाने के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है।

तस्करी के दौरान पकड़े गए अथवा छुïट्टा घूमते मिले गोवंश को यहां रखा जाएगा। इनकी सेवा के लिए जेल में निरुद्ध बंदी और सजायाफ्ता कैदियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इलाहाबाद मंडल में फिलहाल नैनी सेंट्रल जेल में गोशाला संचालित हो रही है। जिला जेल के अफसरों का कहना है कि कौशांबी को यह सौगात मिलना खुशी की बात होगी।

जिला जेल के अधीक्षक बीएस मुकुंद ने बताया कि जिला जेल में गोशाला बनाने के लिए शासन के निर्देश के क्रम में डीएम की सहमति के बाद भूमि चिह्नित कर ली गई है। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। हरी झंडी मिलते ही निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। कैदी गोवंश की सेवा कर निश्चित तौर पर आत्मिक सुख का अनुभव करेंगे, ऐसा मेरा मानना है।

जिले में नहीं है कांजी हाउस

गंगा-यमुना के बीच आबाद इस जिले में एक भी कांजी हाउस नहीं है। तस्करों से बरामद मवेशियों को पुलिस वाले गांव के किसानों को सौंप देते हैं, लेकिन किसान इन्हें छुट्टा छोड़ देते हैं। यह छुïट्टा मवेशी फसलों के लिए मुसीबत और किसानों के लिए सिरदर्द बन जाते हैं। 

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