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कोलकाता में महिलाओं ने सीएए, एनआरसी के विरोध में धरना दिया

कोलकाता में महिलाओं ने सीएए,एनआरसी के विरोध में धरना दिया इतिहास गवाह है कि एक कट्टर और रूढ़िवादी भारतीय समाज में हिंदू व मुसलिम महिलाएँ पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से पहले बड़े पैमाने पर सड़कों पर कभी नहीं उतरी थीं और अब हमारी आँखों के सामने इतिहास बन रहा है.

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धार्मिक भेदभाव को हवा देने वाले नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में करोड़ों भारतीय नागरिकों के साथ हिंदू-मुसलिम महिलाएँ कंधे से कंधा मिलाकर देशव्यापी आंदोलन कर रही हैं। दिल्ली के जामिया नगर स्थित मुसलिम बहुल मोहल्ले की महिलाएँ बीते दो हफ़्तों से ज़्यादा समय से सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ अहिंसक प्रदर्शन करती आ रही हैं। कुछ महिलाएँ तो कई दिनों से घर ही नहीं गई हैं, अन्य महिलाएँ अपने बाल-बच्चों के साथ धरने पर बैठी हैं.

प्रदर्शनकारियों में से एक ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों से पूछना चाहती हूं, उनके पास कौन से दस्तावेज हैं जो उन्हें भारतीय साबित करते हैं। ”कल रात से ही महिलाएं यहां विरोध कर रही हैं। पहचाने जाने के डर से कुछ तो अपना पूरा या असली नाम भी नहीं बताना चाहतीं वही वे इस बात का भी खुलासा करती हैं कि बाप-दादाओं के दस्तावेज़ जुटाने में भारतीयों, ख़ासकर ग़रीबों और मध्य वर्ग के नागरिकों के सामने कैसी-कैसी मुसीबतें पैदा होंगी। एनआरसी, एनपीआर और सीएए की उपयोगिता को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह-मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार के अन्य मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों का अंतर्विरोध सबके सामने ला रही हैं।घरों से निकलकर सड़क पर उतरी इन महिलाओं में अधिकांश संख्या उनकी है, जो अशिक्षित हैं, परिजनों से भयभीत हैं लेकिन पुलिस की लाठी से ज़रा भी नहीं डरतीं। …

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