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चौथी बार टली नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी की बैठक :काठमांडू

प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के राजनीतिक भविष्य का फैसला करने वाली, नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की एक अहम बैठक शुक्रवार को एक बार फिर स्थगित हो गई. इस बार देश में बाढ़ आने की वजह का हवाला देते हुए एक हफ्ते के लिए बैठक टाल दी गई है. भारत विरोधी टिप्पणियों और कामकाज की शैली को लेकर ओली के इस्तीफे की मांग की जा रही है. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की 45 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक शुक्रवार को होनी थी.

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एनसीपी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने बताया कि बचाव एवं राहत कार्यों और मूसलाधार बारिश के बाद गुरुवार से देश भर में बाढ़ और भूस्खलनों से और अधिक नुकसान होने से रोकने के प्रयासों में पार्टी के लगे होने के कारण बैठक टाल दी गई है. देश के पश्चिमी हिस्से में कास्की, लमजुंग और रुकुम जिलों में गुरुवार को कई भूस्खलनों में कम से कम 12 लोग मारे गए.

अधिकारियों के अनुसार, कास्की जिले के मशहूर पर्यटक स्थल पोखर के सारंगकोट और हेमजन इलाकों में भूस्खलनों में सात लोगों की मौत हो गई. यह चौथी बार है जब एनसीपी की अहम बैठक स्थगित हुई है. इससे पहले बुधवार को होने वाली बैठक को शुक्रवार तक के लिए स्थगित किया गया था.

पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ समेत एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग की है. उनका कहना है कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी ‘न तो राजनीतिक रूप से सही थी और न ही राजनयिक रूप से उचित थी.’

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दो धड़ों के बीच मतभेद उस समय बढ़ गये जब प्रधानमंत्री ने एकतरफा फैसला करते हुए संसद के बजट सत्र का समय से पहले ही सत्रावसान करने का फैसला किया. सत्ता में हिस्सेदारी के मुद्दे पर एनसीपी के एक धड़े का नेतृत्व ओली और दूसरे धड़े का नेतृत्व पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ‘प्रचंड’ करते हैं.

ओली पर प्रधानमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष पदों से इस्तीफा देने का जबरदस्त दबाव है क्योंकि एनसीपी के ज्यादातर नेताओं ने कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने में सरकार की नाकामी और पार्टी को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा फैसले लेने के कारण उनसे ऐसा करने को कहा है. रविवार को चीनी राजदूत होउ यान्की ने ओली और प्रचंड के बीच मध्यस्थता के लिए वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल तथा झालानाथ खनल से मुलाकात की.

एनसीपी में पिछले कुछ महीनों से उथल-पुथल चल रही है लेकिन ओली राष्ट्रवादी नारा देकर और नेपाल के राजनीतिक नक्शे में बदलाव करके असंतुष्ट खेमे का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अपने देश के राजनीतिक नक्शे में भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को शामिल कर लिया.

हालांकि पार्टी में अंदरुनी मतभेद पिछले हफ्ते फिर सामने आए जब ओली ने प्रचंड के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे पर नेपाल के दक्षिणी पड़ोसी की मदद से उन्हें हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया.

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