उत्तराखंडप्रदेश

पीएम ने पूछा, टिहरी में तो बिजली बनती है, फिर इतना वक्त कैसे लगा

टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के पांच गांवों के लिए गुरुवार खास बन गया। पंडित दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना से रोशन पांच गांवों के 15 लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये रू-ब-रू हुए तो पीएम ने उनसे पूछा ‘टिहरी में तो बिजली बनती है, फिर इतना वक्त कैसे लग गया।’ इस सवाल पर ग्रामीण बस मुस्करा के रह गए, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री को बिजली होने वाले लाभ की लंबी फेहरिस्त गिनाई। उत्साह से लबरेज मरवाड़ी गांव के अजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री से बात करना हमारे लिए गर्व का विषय है।

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दरअसल, टिहरी जिले के भिलंगना ब्लाक के मरवाड़ी, मेड, उरणी, पिंसवाड़ और गिंवाली की दूरी जिला मुख्यालय नई टिहरी से करीब 100 किमी है। हालांकि अब पिंसवाड, मरवाड़ी, उरणी और मेड सड़क से जुड़ रहे हैं। मरवाड़ी और पिंसवाड़ तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि मेड के लिए निर्माण चल रहा है। वहीं गिंवाली तक पहुंचने के लिए अब भी सड़क से 14 किलोमीटर की दूरी पैदल नापनी होती है। इन गांवों का निकटतम बाजार घनसाली करीब 50 किलोमीटर दूर है। वर्ष 2016 से पहले तक इन पांचों गांवों में बिजली नहीं थी। दो साल पहले दीपावली के दिन पंडित दीनदयाल च्योति योजना के तहत पांचों गांवों का हर घर रोशन हो गया।

 गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडिया कान्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत के लिए इन गांवों के 15 लोग जिला मुख्यालय नई टिहरी में कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचे। करीब तीन मिनट तक चली बातचीत के दौरान मरवाड़ी गांव के रामचंद्र बिष्ट ने ग्रामीणों की ओर से प्रधानमंत्री से बात की। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि टिहरी में विद्युतीकरण का लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।

गांव में चक्की और फोटो स्टेट मशीन

प्रधानमंत्री ने पूछा कि अब बिजली आने से कितनी सहूलियत हुई। रामचंद्र ने बताया कि पहले आटा पिसाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब उनके और पड़ोस के गांव में चक्की है। इतना ही नहीं, पहले एक फोटो कॉपी कराने के लिए ग्रामीणों को घनसाली बाजार जाना पड़ता था। इसमें एक रुपये की फोटो कॉपी के लिए 500 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। आने-जाने में पूरा दिन लग जाता था। अब गांव में ही फोटो स्टेट मशीन है। रामचंद्र ने कहा कि बिजली आने से बच्चों को पढ़ाई में भी फायदा मिला है। अपने तीन बच्चों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पहले बच्चे 50 फीसद तक नंबर लाते थे, अब नब्बे फीसद तक ला रहे हैं।

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