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33 लोगों की जान लेने वाले सीरियल किलर ने पिता को ठहराया अपनी करतूतों का जिम्मेदार

मध्यप्रदेश पुलिस ने कुछ दिनों पहले एक आदेश कामरा नाम के एक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया है जिसने देशभर में 33 ट्रक ड्राइवरों के खून करने की बात को कबूला है। आरोपी का कहना है कि वह कथित तौर पर ऐसा इसलिए है क्योंकि उसे बचपन में पिता से प्यार नहीं मिला। बुधवार को यह बातें उसने एसपी लोढा राहुल कुमार को पूछताछ के दौरान बताईं। 

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कामरा ने कहा, ‘किसी को मेरी परवाह नहीं थी। मैं अंतर्मुखी बन गया। मेरे अंदर बहुत गुस्सा था जिसका मुझे पहले अहसास नहीं हुआ और बाद में मैं एक हिंसक आदमी बन गया।’ पुलिस उसकी बातों को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही है। हालांकि पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई है कि वह जुगाड़ करने में माहिर है। उसने जो पुलिस को बताया उसके अनुसार, उसके पिता गुलाब कामरा सेना से सेवानिवृत्त एक नायब सुबेदार हैं और वह घर में काफी अनुशासन बनाए रखा करते थे। 

किलर ने बताया, ‘उसके पिता बचपन में काफी कड़ा व्यवहार करते थे। वह उसकी पिटाई करते और छोटी-छोटी चीजों की वजह से उसे घर से बाहर कर दिया करते थे। आरोपी का मानना है कि इस तरह की परवरिश की वजह से उसके अंदर और पर्सनैलिटी में व्यावहारिक बदलाव आए हैं।’ एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘यह सीरियल किलर खुद बचपन में मानसिक पीड़ा से गुजर चुका है। हो सकता है इसी वजह से उसके अंदर एक हिंसक फिजिक विकसित हुई हो और इसी वजह से वह बिना किसी पछतावे और मलाल के खून करता रहा हो।’ उसने जो कुछ बताया उसकी हम जांच कर रहे हैं। वह बहुत ही चालाक है।

पुलिस को अब पता चला है कि जुर्म की दुनिया में उसके कदम 2005-06 से ही पड़ गए थे। उसने फिरौती मांगने से शुरुआत की थी ना कि 2010 से जैसा माना जा रहा था। कामरा जुर्म की दुनिया से जुड़े लोगों के संपर्क में बहुत आसानी से आ गया और अपने अंकल अशोक कामरा से काफी प्रभावित हुआ। अशोक एक खतरनाक हत्यारा है जिसने 100 से ज्यादा लोगों की हत्या की है। पहली बार उसने 2007 में एक गैंग के साथ मिलकर ट्रक को लूटा था लेकिन ड्राइवर को नहीं मारा था। 

इस घटना के बाद वह ट्रक लूटने वाले गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया और तीन सालों के अंदर ही उसने खुद के हाईवे चोरों का गैंग बना लिया। जो ट्रक ड्राइवर को लूटकर उनकी हत्या कर देते थे। लोढा ने कहा, ‘लूट की घटना के बाद कामरा ने ट्रक ड्राइवरों को इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि वह पुलिस को उसतक पहुंचने के लिए कोई सबूत नहीं छोड़ना चाहता था। वह इस घटना को अंजाम देता रहा और उसे 2010 में महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।’ डेढ़ साल बाद उसे जमानत मिली और उसने कुछ और अपराधों को अंजाम दिया। लोढा ने बताया कि पकड़े जाने के बाद वह घटना को बहुत ही सफाई से अंजाम देता था ताकि पकड़ा ना जाए लेकिन अपने साथी जयकरण की वजह से पकड़ा गया।

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