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सत्य और असत्य के बीच सोशल मीडिया ने खड़ा कर दिया अर्धसत्य का संकट: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज सत्य और असत्य के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने अर्धसत्य का एक नया संकट खड़ा कर दिया है। अर्धसत्य कभी सत्य नहीं हो सकता। जब व्यक्ति सत्य और असत्य के बीच अंतर नहीं कर पाता तो भ्रम की स्थिति पैदा होती है। यही भ्रम जीवन में अज्ञानता का कारण बनता है। विज्ञान कितना भी आगे बढ़ जाए, जीवन में सुख और स्थायी शांति की तलाश अंततः मनुष्य को भारत की सनातन परंपरा की ओर ले जाती है।

मुख्यमंत्री योगी बुधवार को गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ एवं कथा व्यास रेवासा धाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद अखंड ज्योति की स्थापना, व्यासपीठ का पारंपरिक पूजन-अर्चन और श्रीमद्भागवत की स्थापना कर कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कथा 29 सितंबर तक चलेगी।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि व्यक्ति के विचार और आचरण में समानता हो तो उसका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। मनसा, वाचा और कर्मणा जब एक दिशा में चलते हैं तो जीवन में सफलता मिलती है। इसके विपरीत व्यक्ति बोलता कुछ है, करता कुछ है और मन में कुछ और रखता है तो भ्रम की स्थिति पैदा होती है। ऐसी स्थिति व्यक्ति को न घर का रखती है, न घाट का। जीवन में अज्ञानता का यही मूल कारण भी है।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की मानवता के सामने मानसिक अशांति बड़ी चुनौती है। विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है, लेकिन जीवन में सुख और स्थायी शांति कैसे मिले, इसका उत्तर केवल भौतिक प्रगति में नहीं है। भारत की ऋषि परंपरा और कथा की पावन परंपराएं मनुष्य को जीवन का उद्देश्य समझने और सही मार्ग तलाशने में सहायता करती हैं।

पांच हजार वर्षों से जीवंत है भागवत कथा की परंपरा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा पांच हजार वर्षों से भारत की स्मृति और परंपरा में जीवंत है। शुकदेव महाराज द्वारा राजा परीक्षित को इस पावन कथा का श्रवण कराने से लेकर आज तक एक लंबा कालखंड बीत चुका है। युग पर युग बीते और सनातन धर्म ने अनेक विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। उत्थान और पतन का क्रम चलता रहा, लेकिन भारत की स्मृति में पावन ऋषि परंपरा और कथा की परंपरा सदैव जीवित रही। कोई भी इसे भारत की स्मृति से हटा नहीं पाया।

उन्होंने कहा कि आज भी जब इस पावन कथा का आयोजन होता है तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु इसका हिस्सा बनते हैं। कथा के माध्यम से वे जीवन की वास्तविकता का अनुभव करते हैं, अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का प्रयास करते हैं और अज्ञानता से मुक्त होने का मार्ग तलाशते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म की नई प्रेरणा देती है।

धर्म, संस्कृति और विरासत को समझने का अवसर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ में वर्ष में दो-तीन बार पावन कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपने धर्म, संस्कृति, परंपरा, मान बिंदुओं और विरासत को समझने का अवसर प्राप्त होता है। कथा की ये पावन परंपराएं जीवन के मार्ग को सुगम और सरल बनाने में अपना योगदान देती हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि श्रद्धालुओं का सौभाग्य है कि इस वर्ष उन्हें वृंदावन धाम से पधारे परम वीतरागी संत मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के श्रीमुख से इस पावन कथा को सुनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज का गोरक्षपीठ आगमन पर अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने विचारों के अनुरूप अपना जीवन जिया है।

साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कथा ज्ञान यज्ञ
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसी श्रृंखला में अपराह्न सत्र में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ और प्रातःकालीन सत्र में भारत की सनातन परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण और ज्वलंत विषयों पर विद्वत समाज की गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। मुख्यमंत्री योगी ने दोनों ब्रह्मलीन आचार्यों के श्रीचरणों में नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में अयोध्या धाम से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य एवं सुग्रीव किलाधीश स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य, जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य, बड़े भक्तमाल के स्वामी अवधेश दास, स्वामी रामानंद दास, महंत राजू दास, महंत राम लखन दास, महंत बालक दास, गाजियाबाद के दूधेश्वरनाथ मंदिर से पधारे जूना अखाड़ा के श्रीमहंत नारायण गिरी, महंत जय बक्स दास समेत अन्य संतजन, यजमान और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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