मुख्यमंत्री ने मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने और अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की हर उस साजिश का विरोध होना चाहिए, जिसके कारण दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। यह अत्यन्त आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तथा यू0पी0ए0 गठबंधन से जुड़े अन्य दलों की वर्तमान हरकतें और बयानबाजी लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने वाली दिखाई दे रही हैं।
मुख्यमंत्री जी आज यहां आयोजित प्रेसवार्ता में मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एस0आई0आर0 (स्पेशल इनटेन्सिव रिवीजन) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। देश में इससे पहले भी विभिन्न अवसरों पर वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66, 2003 आदि वर्षाें में गहन पुनरीक्षण की कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद वर्तमान एस0आई0आर0 को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आर0जे0डी0 और अन्य विपक्षी दलों द्वारा जिस प्रकार का अनर्गल प्रलाप किया जा रहा है, वह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कांग्रेस जैसी पार्टी, जिसने देश में लम्बे समय तक शासन किया है, लगातार निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़ा कर रही है। यदि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आर0जे0डी0 या अन्य विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, तो उसका श्रेय अपने पुरुषार्थ को देते हैं, लेकिन यदि जनता उनके भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार, कुनीति और अराजक कार्यप्रणाली के कारण उन्हें अस्वीकार करती है तो उसके लिए निर्वाचन आयोग अथवा ई0वी0एम0 को दोषी ठहराना कितना उचित है, इस पर इन दलों को स्वयं चिन्तन और आत्मावलोकन करना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लगातार देश की प्रत्येक संवैधानिक संस्था को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा कैम्ब्रिज में भारत की न्यायपालिका और उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास देश की संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करते हैं। वर्ष 2019 में राफेल के मुद्दे पर कैग की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर भी सवाल खड़े किए गए थे। जिस ई0वी0एम0 के माध्यम से कांग्रेस की स्वयं केन्द्र और विभिन्न राज्यों में सरकारें बनी हैं, उसी ई0वी0एम0 को ‘ब्लैक बॉक्स’ बताकर भारत की चुनाव प्रणाली और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर प्रश्न खड़ा करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसके दृष्टिकोण को देश भली-भांति जानता है। 25 जून, 1975 को लगाए गए आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गम्भीर आघात हुआ। कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों ने पूर्व में विपक्षी दलों की निर्वाचित सरकारों को अनैतिक एवं अवैध तरीके से गिराने का भी कार्य किया। भ्रष्ट कार्यप्रणाली और आर्थिक कदाचार के साथ-साथ देश की आन्तरिक एवं वाह्य सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी कांग्रेस की सरकारों के कार्यों पर सवाल उठते रहे हैं।
बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय भारतीय सेना के शौर्य पर प्रश्न खड़े करना तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के बहादुर जवानों के शौर्य और पराक्रम को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करना कहां की देशभक्ति है। वर्तमान में भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा इसी प्रकार की गैर जिम्मेदाराना हरकतें की जा रही हैं। तीनों चुनाव आयुक्तों ने मीडिया के सामने आकर एस0आई0आर0 की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपने नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का अवसर उपलब्ध है।
फॉर्म-6 के माध्यम से नए पात्र मतदाताओं के पंजीकरण की व्यवस्था उपलब्ध है। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों को लगातार कटघरे में खड़ा करना समझ से परे है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब निर्वाचन आयोग ने पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है और पात्र मतदाताओं के लिए आवश्यक प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई गई है, तब भी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों द्वारा लगातार प्रश्न खड़े करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। विपक्षी दलों द्वारा बाल की खाल उधेड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विपक्षी दल यदि प्रदर्शन करते हैं, तोड़फोड़ करते हैं अथवा निर्वाचन आयोग से जुड़े कार्यालयों और संस्थानों को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हैं, तो यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। लोकतंत्र में हिंसा और तोड़फोड़ के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं के विरुद्ध दुष्प्रचार के लिए भी कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां संविधान ने प्रत्येक पात्र वयस्क नागरिक को बिना जाति, क्षेत्र, भाषा अथवा लिंग के भेदभाव के मतदान का अधिकार दिया है। भारत की चुनाव व्यवस्था में पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने, संशोधन और आवेदन की निर्धारित पारदर्शी प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया को लगातार प्रश्नचिन्ह के दायरे में लाना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर देश की बदनामी कराने का कोई भी प्रयास उचित नहीं है।
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपनी इन गैर जिम्मेदाराना हरकतों पर नियंत्रण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार प्रश्न खड़े करने, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भ्रम फैलाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के प्रयास से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपने इस कृत्य के लिए देश की संवैधानिक संस्थाओं तथा देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन असहमति के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की इन गैर जिम्मेदाराना हरकतों की निन्दा की जानी चाहिए। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संविधान के प्रति सम्मान प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।



