बजट से कृषि अनुसंधान एवं कौशल विकास को मिलेगी गति : डा. बिजेंद्र सिंह

अयोध्या। बजट में केंद्र सरकार की ओर से किसानों की आय में वृद्धि, उत्पादकता एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण को लेकर प्राविधान किया गया है, जिसको कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने जमकर सराहा। कुलपति ने कहा कि यह बजट कृषि को “ज्ञान, तकनीक और उद्यमिता आधारित क्षेत्र” में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विवि इस दिशा में अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और किसानों के प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा, जिससे पूर्वांचल सहित देश के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। कुलपति का कहना है कि यह बजट पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर उच्च मूल्य कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि प्रौद्योगिकी एकीकरण की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। यह बजट किसानों को केवल उत्पादकता के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी के रूप में स्थापित करने की सोच को और मजबूत करेगा। विशेष फसलों के लिए यह योजनाएं मूल्य श्रृंखला विकास और प्रसंस्करण उद्योग को गति देंगी। स्थानीय स्तर पर चंदन की खेती एवं प्रसंस्करण से उच्च मूल्य कृषि को प्रोत्साहन भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पशु चिकित्सा सेवाओं, डायग्नोस्टिक लैब, ब्रीडिंग सुविधाओं तथा कौशल विकास के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर सृजित होंगे। कुलपति ने बताया कि इस केंद्रीय बजट से कृषि संरचना पोर्टल तथा आई.सी.ए.आर प्रणालियों के साथ-साथ ए.आई पर आधारित कृषि पैकेजों का एकीकरण होगा। जिससे एक संपूर्ण डेटाबेस बनाने में मदद मिलेगी और उनकी पहचान भूमि रिकार्ड, आय, ऋण फसल की जानकारी और बीमा इतिहास आदि के लिए किया जा सकेगा। 500 जलाशयों, अमृत सरोवरों के विकास, महिला समूहों एवं एफपीओ की भागीदारी से मत्स्य किसानों की आय दोगुणी होगी। 10,000 करोड़ रुपये से सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम को और प्रभावी एवं आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा। भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जोखिम पूंजी सूक्ष्म उद्यमों, कृषि स्टार्टअप और महिला उद्यमियों को समर्थन देगा। “लखपति दीदी” योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को लखपति आय वर्ग तक पहुंचाने के लिए कौशल विकास, वित्तीय सहायता और सूक्ष्म उद्यम स्थापना को भी बढ़ावा मिल सकेगा।



