पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर समयबद्ध क्रियान्वयन पर दिया जोर

पंचायती राज विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजट से संबंधित कार्यों तथा ग्राम पंचायतों में विकासपरक गतिविधियों की समीक्षा के लिए शुक्रवार को विधान भवन में बैठक आयोजित की गई। पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में प्रमुख सचिव, पंचायती राज श्री रविन्द्र, पंचायती राज निदेशक श्री अमित सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर ने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की अद्यतन प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों में संचालित विकास कार्यों का लाभ ग्रामीणों तक समय से पहुंचे और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के अंतर्गत फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (थ्ैज्च्) की स्थापना के लिए प्राप्त धनराशि के उपयोग तथा आवश्यक कार्यवाही की समीक्षा की गई। इसके साथ ही सूचना, शिक्षा एवं संचार (प्म्ब्) गतिविधियों के प्रभावी संचालन पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ग्राम सौर योजना के अंतर्गत 2,500 से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में सोलर ऊर्जा आधारित हाईमास्ट एवं लाइट की व्यवस्था को लेकर भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक स्थानों को बेहतर रोशनी से जोड़ने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने से संबंधित कार्यों को गति देने पर चर्चा हुई।
राज्य बजट, केंद्र बजट एवं अनुपूरक बजट से संबंधित योजनाओं के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। इसके तहत डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना, आधार सेवा केंद्रों की स्थापना तथा ग्राम पंचायत सचिवों को शासकीय कार्यों के सुचारु निष्पादन के लिए स्मार्ट मोबाइल उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
डिजिटल लाइब्रेरी के अंतर्गत पुस्तकों, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से जोड़ना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों के सत्यापन, जल गुणवत्ता से संबंधित कार्यों तथा जियो-टैगिंग की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ ही उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। इसलिए पंचायत स्तर पर संचालित प्रत्येक योजना का प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की नियमित समीक्षा करने, कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दिया।
बैठक में अधिकारियों द्वारा विभागीय योजनाओं की वर्तमान प्रगति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई। मंत्री ने विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता, सौर ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देकर ग्राम पंचायतों को और अधिक सक्षम एवं सुविधासंपन्न बनाया जा रहा है।
. अम्बेडकर इण्टरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में 22 सितम्बर, 2026 को आयोजित ’राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार समारोह’ में प्रदेश की 08 सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लि., (छथ्ब्ैथ्) नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किया गया उत्कृष्ट दक्षता पुरस्कार से सम्मानित
वर्ष 2024-25 में दि किसान सहकारी चीनी मिल, स्नेह रोड नजीबाबाद (बिजनौर) को सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल का पुरस्कार, सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां (लखीमपुर खीरी) को गन्ना विकास के क्षेत्र में, दि किसान सहकारी चीनी मिल, गजरौला (अमरोहा) को चीनी परता एवं बागपत को-ऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, बागपत को वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित
वर्ष 2025-26 में दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना (मुजफ्फरनगर) को गन्ना विकास के क्षेत्र में, रमाला सहकारी चीनी मिल, रमाला (बागपत) को तकनीकी दक्षता, दि किसान सहकारी चीनी मिल, सठियांव (आजमगढ़) को तकनीकी दक्षता एवं दि किसान सहकारी चीनी मिल, पुवायां (शाहजहांपुर) को वित्तीय प्रबंधन हेतु उत्कृष्ट दक्षता पुरस्कार से नवाजा गया
प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी केे सहकारी चीनी उद्योग को मजबूती प्रदान करने सम्बन्धी आदेशों के क्रम में मा. मंत्री चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी जी के निर्देशों के क्रम में शासन द्वारा सहकारी चीनी मिलों के प्रबन्धन में सुधार कर उनकी कार्यक्षमता में सुधार एवं आधुनिकीकरण की प्रक्रिया लगातार गतिमान है। शासन के कुशल मार्गदर्शन एवं लगातार की जा रही साप्ताहिक समीक्षा से प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों की कार्यप्रणाली में बेहतर प्रबंधन के कारण निरन्तर सुधार परिलक्षित हो रहा है, जिसके फलस्वरूप प्रदेश की 08 सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लि.,(छथ्ब्ैथ्) नई दिल्ली द्वारा डॉ. अम्बेडकर इण्टर नेशनल सेंटर, नई दिल्ली में 22 सितम्बर, 2026 को आयोजित ’राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार समारोह’ में सर्वश्रेष्ठ दक्षता पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया है।
राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लि.,(छथ्ब्ैथ्) नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर देश की सहकारी चीनी मिलों को गन्ना विकास, तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रबंधन और समग्र प्रदर्शन जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं विशिष्ट योगदान हेतु दक्षता पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिये जाते हैं, जिससे सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों की कार्यक्षमता एवं दक्षता में सुधार के साथ-साथ वृद्धि हो सके। वर्ष 2024-25 के लिए घोषित पुरस्कारों में प्रदेश की दि किसान सहकारी चीनी मिल, स्नेह रोड, नजीबाबाद (बिजनौर) को सभी मानकों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने हेतु समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल का प्रतिष्ठित पुरस्कार, सरजू सहकारी चीनी मिल, बेलरायां (लखीमपुर खीरी) को गन्ना विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु, दि किसान सहकारी चीनी मिल, गजरौला (अमरोहा) को चीनी परता (शुगर रिकवरी) में सुधार हेतु एवं बागपत को-ऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, बागपत को वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु पुरस्कार प्रदान किया गया है।
वर्ष 2025-26 हेतु घोषित पुरस्कारों में भी प्रदेश की चार अन्य सहकारी चीनी मिलों ने अपना परचम लहराया है। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना (मुजफ्फरनगर) को गन्ना विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु, रमाला सहकारी चीनी मिल, रमाला (बागपत) को उल्लेखनीय तकनीकी दक्षता प्राप्त करने हेतु, पूर्वी उत्तर प्रदेश की दि किसान सहकारी चीनी मिल, सठियांव (आजमगढ़) को भी उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता प्राप्त करने हेतु तथा मध्य उत्तर प्रदेश की दि किसान सहकारी चीनी मिल, पुवायां (शाहजहांपुर) को उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार से नवाजा गया है।
उत्तर प्रदेश शासन ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की विजेता सभी 08 सहकारी चीनी मिलों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रदेश की अन्य सभी सहकारी चीनी मिलों से अपेक्षा की है कि वे भी प्रयत्नशील रहकर आगामी वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान समारोह में अपना नाम अवश्य दर्ज करायेंगें।
सम्पर्क सूत्र- अमित शुक्ला
बचपन जीवन का वह स्वर्णिम काल है, इस उम्र में शरीर और मस्तिष्क का विकास सबसे तेजी से होता है। इस उम्र में मिलने वाला पौष्टिक आहार बच्चों के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव तैयार करता है। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में ‘हॉट कुक्ड मील योजना’ के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को गर्म एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रही है।
भारत सरकार के ‘पोषण 2.0’ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को माह में 25 दिन अर्थात वर्ष में 300 दिन अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र पर ही गर्म-पका भोजन उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर पोषण प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों से नियमित रूप से जोड़ना भी है।
उत्तर प्रदेश में 24 नवंबर, 2023 को जनपद अयोध्या से मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा हॉट कुक्ड मील योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के प्रारंभ होने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले नन्हे-मुन्नों के लिए पोषण की थाली में गर्म भोजन का स्वाद और पौष्टिकता दोनों शामिल हुए हैं। हॉट कुक्ड मील योजना महज बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक विकास को एक साथ मजबूत करने का प्रयास है। गर्म और ताजा भोजन मिलने से बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का आकर्षण बढ़ा है। 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों को आटा, वेशन बर्फी (मीठा) दलिया, मूॅग, सोया खिचड़ी (नमकीन) तथा अतिकुपोषित बच्चों को ऊर्जायुक्त दलिया, हलवा आदि दिया जाता है। इसका सकारात्मक असर बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति पर भी दिखाई दे रहा है।
प्रदेश में संचालित 1,89,621 आंगनबाड़ी केंद्र पहले से ही बच्चों के प्रारंभिक विकास और पोषण का महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। यहां बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से जोड़ा जाता है। ऐसे में हॉट कुक्ड मील योजना ने इन केंद्रों की उपयोगिता को और व्यापक बनाया है। भोजन की एक गर्म थाली बच्चों को पोषण देने के साथ उन्हें सीखने, खेलने और स्वस्थ वातावरण में विकसित होने का अवसर भी प्रदान करती है।
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसका प्रभाव केवल तत्काल भोजन तक सीमित नहीं है। संतुलित पोषण बच्चों की शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि हॉट कुक्ड मील को सुपोषित बचपन के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

योजना के संचालन से आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों का नामांकन, उपस्थिति तथा पोषण स्तर सुधारने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। लाखों की संख्या में बच्चे ऑगनबाड़ी केन्द्रों में आ रहे है। इससे अभिभावकों का भी आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास बढ़ रहा है और केंद्र बच्चों के लिए पोषण एवं विकास के अधिक प्रभावी केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की यह योजना एक गर्म भोजन की थाली में सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य की उम्मीद भी परोसी जा रही है। हॉट कुक्ड मील योजना इसी भावना के साथ उत्तर प्रदेश में सुपोषित बचपन की नींव को मजबूत कर रही है। स्वस्थ बचपन से ही स्वस्थ समाज और सशक्त प्रदेश का निर्माण संभव है। इसी संकल्प के साथ यह योजना ‘पोषण से प्रगति’ और ‘सुपोषित बचपन से सशक्त भविष्य’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन रही है।पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ देश और प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना आम नागरिकों के घरेलू बजट को संतुलित करने के साथ उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार ला रही है। उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद की निवासी एवं स्थानीय निजी विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सरिता रानी इस योजना की एक विशिष्ट और प्रेरक लाभार्थी के रूप में सामने आई हैं। उन्होंने सौर ऊर्जा को न केवल अपनी आर्थिक बचत का आधार बनाया, बल्कि उस बचत से समाज के वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा को संबल प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्रीमती सरिता रानी ने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के तकनीकी मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के सहयोग से अपने आवास की छत पर 03 किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया। इस संयंत्र की स्थापना पर उन्हें केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रावधानों के तहत कुल 1,08,000 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इसमें केंद्र सरकार द्वारा अनुमन्य 78,000 रुपये की वित्तीय सहायता तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली 30,000 रुपये की अतिरिक्त राज्य टॉप-अप सब्सिडी शामिल है। यह संपूर्ण अनुदान राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित की गई, जिससे संयंत्र स्थापना का वित्तीय भार न्यूनतम हो गया। रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना और नेट-मीटरिंग प्रणाली के संचालन के उपरांत उनके परिवार को विद्युत बिलों के भारी आर्थिक बोझ से स्थायी राहत मिली है। संयंत्र से होने वाले सतत उत्पादन के चलते उन्हें प्रतिमाह लगभग 4,000 से 4,500 रुपये तक की नियमित बचत हो रही है। पूर्व में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक विद्युत आपूर्ति के मासिक भुगतान में व्यय होता था, किंतु अब आवासीय ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति स्वतः उत्पादित स्वच्छ सौर ऊर्जा से हो रही है।
शिक्षा क्षेत्र से निरंतर जुड़े रहने के कारण श्रीमती सरिता रानी ने अपने कार्यक्षेत्र में अनुभव किया कि आर्थिक रूप से विपन्न परिवारों के कई बच्चे बुनियादी संसाधनों के अभाव में नियमित अध्ययन जारी रखने में कठिनाई महसूस करते हैं। पाठ्य-पुस्तकों, स्कूल यूनिफॉर्म और सामान्य मासिक शुल्क का प्रबंध न हो पाना उनकी शिक्षा में प्रमुख रुकावट बनता था। इस सामाजिक आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने सौर संयंत्र से होने वाली मासिक आर्थिक बचत को व्यक्तिगत उपभोग तक सीमित न रखकर गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा पर व्यय करने का संकल्प लिया। बिजली के बिल में होने वाली इस नियमित बचत से वे निरंतर निर्धन छात्रों को पाठ्य-पुस्तकें, नोटबुक, विद्यालयी गणवेश और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही अत्यंत असहाय बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति भी इसी राशि से की जा रही है। इस संवेदनशील पहल के माध्यम से सौर ऊर्जा से प्राप्त आर्थिक लाभ का विस्तार व्यक्तिगत गृहस्थी से आगे बढ़कर सीधे समाज और भावी पीढ़ी के सशक्तीकरण तक पहुंच रहा है।
श्रीमती सरिता रानी अपने व्यक्तिगत अनुभव को प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करते हुए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता का प्रसार भी कर रही हैं। वे आमजन को प्रेरित करते हुए स्पष्ट संदेश देती हैं कि सूर्य को अपने परिवार का एक उत्पादक सदस्य बनाया जाए और उससे प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभ का उपयोग संतानों की उच्च शिक्षा तथा सुरक्षित भविष्य निर्माण में किया जाए। उनका यह व्यवहारिक दृष्टिकोण स्थानीय स्तर पर आम नागरिकों के मध्य पर्यावरण-संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक नई सोच विकसित कर रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरे प्रदेश में मिशन मोड के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के अधिक से अधिक आवासीय भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। यूपीनेडा को इस व्यापक अभियान की राज्य स्तरीय नोडल संस्था का दायित्व सौंपा गया है, जो जिला प्रशासन और क्षेत्रीय तंत्र के समन्वय से समस्त तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति दे रही है। घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा प्रणाली अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय सहायता के अतिरिक्त अपनी ओर से विशेष राज्य स्तरीय टॉप-अप अनुदान दे रही है। नीतिगत व्यवस्था के अनुसार 1 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर राज्य सरकार द्वारा 15,000 रुपये तथा 02 किलोवाट अथवा उससे अधिक क्षमता पर 30,000 रुपये का अतिरिक्त अनुदान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जा रहा है। इस प्रकार केंद्र और राज्य के संयुक्त अनुदान से 03 किलोवाट तक के संयंत्रों पर उपभोक्ताओं को एक लाख रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय राहत प्राप्त हो रही है।
योजना की क्रियान्वयन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल की व्यवस्था लागू की गई है। इस सिंगल विंडो डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से वेंडर का चयन, तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट (टीएफआर) का अनुमोदन और बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दरों पर संपार्श्विक-मुक्त ऋण की सुविधा पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध है। प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को प्राप्त आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण, लोड स्वीकृति और त्वरित गति से स्मार्ट नेट-मीटरिंग स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा जनपद अयोध्या को प्रदेश की पहली मॉडल सोलर सिटी के रूप में सफलतापूर्वक विकसित किए जाने के उपरांत, अब इसी क्लस्टर मॉडल को मुरादाबाद सहित अन्य सभी नगर निगमों और प्रमुख जनपदों में सुनियोजित रूप से लागू किया जा रहा है। आवासीय बस्तियों और कॉलोनियों को क्लस्टर स्तर पर चिन्हित कर वहां व्यापक स्तर पर रूफटॉप सोलर लगाने का कार्य प्राथमिकता पर जारी है। ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के इस सुनियोजित विस्तार से प्रदेश के पात्र उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट तक निःशुल्क सौर बिजली का वास्तविक लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे जहां एक ओर परिवारों का घरेलू बिजली बिल शून्य हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक थर्मल पावर ग्रिड पर निर्भरता और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है। मुरादाबाद की श्रीमती सरिता रानी जैसी जागरूक लाभार्थियों के माध्यम से यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक कल्याण का एक प्रभावी आधार बन चुकी है।



