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बनाया गया फास्‍ट ट्रैक, दुष्‍कर्म मामलों को जल्द निपटाने के लिये, कोर्ट की हालत खराब हुई .

आज देश में स्थितियों में बदलाव के उलट बर्बरतापूर्ण दुष्कर्म के वीभत्स मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। दरिंदगी देखिए, सिर्फ दुष्कर्म करने से उन दरिंदों का पौरुषत्व पूरा नहीं हुआ तो वे लड़कियों को जिंदा जलाने, पत्थरों से कुचलने तक लग गए। हम इंसाफ के लिए मोमबत्तियां जलाते रहे और वे दरिंदे लड़कियों को जिंदा जलाते रहे।

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आखिर यह कहां का इंसाफ है? मानवाधिकार की वकालत करने वाले तो यह कहेंगे ही कि आरोपियों से लेकर दोषियों तक, सभी के मानवाधिकार हैं। लेकिन क्या कोई यह भी बताएगा कि मानवाधिकार मानवों के लिए बनाए गए हैं या हैवानों के लिए? क्या जो लड़कियां जिंदा जला दी गईं,

आज ना सिर्फ निर्भया या फिर हैदराबाद की महिला पशु चिकित्सक के, बल्कि उन सभी तमाम लड़कियों की मांओं को, पिताओं को, भाइयों को, बहनों को, दोस्तों को, रिश्तेदारों को एक सुकून तो जरूर मिला होगा कि कम-से-कम किसी एक पीड़ित लड़की को आखिरकार इंसाफ तो मिला।

ये सभी आरोपी पुलिस की हिरासत में थे और पूछताछ में सभी आरोपियों ने स्वीकार कर लिया था कि उन्होंने ही महिला डॉक्टर के साथ इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को पुलिस रिमांड में भेज दिया था क्राइम सीन रिक्रिएट कर मिनट दर मिनट घटनाक्रम की कड़ी को जोड़ने के लिए।

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